अमेरिका का एक फैसला भारत में सस्ता करा सकता है पेट्रोल-डीजल! ईरान से भी है कनेक्शन

अमेरिका का एक फैसला भारत में सस्ता करा सकता है पेट्रोल-डीजल! ईरान से भी है कनेक्शन


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  • होर्मुज हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान का लाइसेंस रद्द किया.
  • भारत का ईरान से कच्चा तेल खरीदने का मौका गंवाया.
  • ईरान से पुराने तेल सौदे 2026 तक पूरे करने होंगे.

Iranian Crude Oil Supply: अमेरिका ने ईरान को अपना तेल बेचन के लिए एक स्पेशल लाइसेंस (Sanctions Waiver) दिया था, जिसे अब कैंसिल कर दिया गया है. पिछले महीने जून में अमेरी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के लिए General License X जारी किया था. इसके तहत, ईरान को अगले 60 दिनों के लिए 21 अगस्त तक अपना तेल दुनिया में कानूनी तरीके से बेचने की इजाजत दी गई थी.

इस बीच होर्मुज (Strait of Hormuz) में कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए हमले और इस पर कल रातभर अमेरिका की जवाबी कार्रवाई के बाद अब लाइसेंस को रद्द करने का नया आदेश जारी कर दिया है. यानी कि अब ईरान से तेल की खरीद को लेकर कोई नया सौदा या लोडिंग नहीं की जा सकेगी. 

भारत का ईरान से तेल खरीदने का था प्लान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से लाइसेंस रद्द करने का फैसला सुनाए जाने से पहले भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियां ईरानी कच्चे तेल की मार्केटिंग करने वाले ट्रेडर्स के साथ बातचीत कर रही थीं. भारत चाह रहा था कि अगर अमेरिका ईरान को तेल बेचने के लिए दी गई छूट को कुछ समय के लिए और बढ़ा देता है या पाबंदियों में ढील देता है, तो वे तेल खरीदने के लिए आगे कदम बढ़ा सकते हैं. फिलहाल तुंरत यह खरीद मुमकिन इसलिए नहीं था क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव के दौरान सप्लाई सुरक्षित करने की कोशिश में भारतीय रिफाइनरियां अगस्त तक के लिए जरूरी शिपमेंट के कॉन्ट्रैक्ट पहले ही कर लिए थे. 

अब आगे क्या?

ईरान के क्रूड ऑयल पर दोबारा से लगाए गए प्रतिबंध के बाद अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कंपनियों को 17 जुलाई, 2026 तक का समय दे दिया है. इस बीच, कंपनियों को ईरानी रिफाइनरीज के साथ चल रही डील्स और वित्तीय लेनदेन पूरा करने के लिए कहा है. इस तारीख के बाद ईरान के किसी भी पोर्ट से कच्चे तेल की लोडिंग नहीं होगी. भारत को ईरान से कच्चे तेल का आयात शुरू करने का एक मौका मिला था, वह अब हाथ से चला गया है.

हालांकि, गनीमत यह है कि अमेरिकी छूट के भरोसे भारतीय रिफाइनरीज अभी ईरान से तेल की खरीद को लेकर बातचीत शुरू ही की थी, कोई बड़ा भुगतान या सौदा नहीं किया था. अगर ऐसा होता, तो भारत को अच्छा-खासा नुकसान उठाना पड़ता.

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