तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बयानबाजी करने के मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर बड़ी राहत मिली है. गुरुवार (21 मई, 2026) को कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा देते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया. हालांकि, उनकी इन टिप्पणियों पर हाईकोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई है और पूछा है कि एक सांसद होते हुए वह ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयान कैसे दे सकते हैं.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वह अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 31 जुलाई तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे. सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने आगे कहा कि यह अंतरिम सुरक्षा इस शर्त पर दी जा रही है कि अभिषेक बनर्जी पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे.
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता (अभिषेक बनर्जी) बिना पहले से अनुमति लिए विदेश यात्रा नहीं कर सकता और किसी भी आवाजाही से पहले जांच अधिकारी को 48 घंटे का नोटिस देना अनिवार्य है. हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी रैलियों में की गई अपनी टिप्पणियों को लेकर अपने खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी. उन्होंने रैली में कहा था, ‘मैं देखूंगा कि 4 मई को कौन इन्हें बचाने आएगा. मैं देखूंगा दिल्ली से कौन गॉडफादर आकर इन्हें बचाएगा?’ आरोप है कि अमित शाह को संबोधित करते हुए उन्होंने गॉडफादर कहा था.
शिकायतकर्ता ने टीएमसी सांसद पर विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाते हुए भड़काऊ भाषण देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया था. सीनियर एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय हाईकोर्ट में अभिषेक बनर्जी की तरफ से पेश हुए और आरोप लगाया कि उनके क्लाइंट के खिलाफ मामला दुर्भावनापूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘यह सत्ता बदलने के तुरंत बाद दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुकदमा चलाने के खिलाफ है.’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अभिषेक बनर्जी को विवादित टिप्पणियां बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए थीं. कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के बयान पर कहा, ‘ऐसे बयान क्यों दिए? चुनाव से ठीक पहले ऐसे गैरजिम्मेदार बयान क्यों दिए? इस राज्य का इतिहास ऐसा रहा है कि चुनाव के बाद हिंसा… मीडिया में भी सब जगह यह दिखाया गया. क्या ये बयान याचिकाकर्ता (अभिषेक बनर्जी) के पद से मेल खाता है, जो एक राजनीतिक पार्टी के महासचिव हैं.’
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एडवोकेट बंद्योपाध्याय ने कहा कि जब इस बयान के बाद हिंसा हुई ही नहीं है तो क्यों इस मामले को उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को डर था कि ऐसे बयान से हिंसा भड़क सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और शिकायतकर्ता ने भी ऐसी किसी घटना का जिक्र नहीं किया है तो इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता.
कोर्ट ने कल्याण बंद्योपाध्याय से कहा, ‘एक सांसद होते हुए ऐसा बयान कैसे दिया जा सकता है? यह बात अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देती है. मैं फिर कह रहा हूं, ऐसे बयान की जरूरत नहीं थी.’ कोर्ट ने उनसे कहा कि हालांकि अभिषेक बनर्जी के बयान के बाद कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन अगर परिणाम कुछ और होते तो फिर क्या होता.
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