- रूस ने पुतिन की सुरक्षा हेतु विशेष निगरानी प्रणाली बंद की।
- ईरान नेता की हैकिंग बाद रूस को अपनी सुरक्षा की चिंता।
- यूक्रेन ने रूसी सिस्टम हैक किया, एआई खतरा बढ़ा।
Putin Surveillance System: बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ज्वाइंट स्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को ढेर कर दिया था. इजरायल ने खामनेई समेत ईरान के बड़े नेताओं और अधिकारियों की लोकेशन जानने के लिए तेहरान के CCTV नेटवर्क को हैक कर लिया था. फिर इसी सूचना के आधार पर खामनेई को टारगेट किया. यह जानकारी सामने आने के बाद रूस की भी चिंताएं बढ़ गई हैं. अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस की सिक्योरिटी एजेंसियों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर की सुरक्षा के लिए यूज किए जाने वाले स्पेशल सर्विलांस सिस्टम को बंद कर दिया है. यह सिस्टम रूस की राजधानी मॉस्को में लगे लगभग 3 लाख सर्विलांस कैमरा से अलग है.
रूस को सता रही है हैकिंग की चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने नागरिकों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सर्विलांस सिस्टम को हैकिंग के खतरे से बचने के लिए जांचा-परखा है. इंटरनेट से पूरी तरह कट करने के बाद ही इस सिस्टम को फिर से ऑन किया गया है. दरअसल, अब खुफिया एजेंसियां एआई की मदद से हजारों घंटों के फुटेज देखकर किसी बड़े नेता की मूवमेंट का पैटर्न पहचान सकती हैं. इजरायल ने भी एआई की मदद से सीसीटीवी कैमरा की फुटेज को एनालाइज कर खामनेई की मूवमेंट का पता लगाया था. एआई आने के बाद सिस्टम इतने एडवांस हो गए हैं कि सड़क पर चलती गाड़ी की नंबर प्लेट तक को देखा जा सकता है. अगर एक बार सिस्टम किसी सब्जेक्ट को पहचान ले तो मूवमेंट समेत उसका पूरा प्रोफाइल तैयार कर सकता है.
यूक्रेन से हैकिंग का खतरा
रूसी अधिकारियों को पुतिन की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है. हाल ही में यूक्रेन की इंटेलीजेंस सर्विसेस ने रूस के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम को हैक कर लिया था. इसके अलावा रूसी सेना के बड़े अधिकारियों को टारगेट करने के लिए मोबाइल फोन की लोकेशन से जुड़े डेटा को भी यूज किया गया था. यूक्रेन के एक हैकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि मॉस्को के कैमराज काम कर रहे हैं और इन्हें रेगुलरली हैक किया जाता है. अपने बयान में उसने क्रेमलिन के आसपास लगे कैमरों का भी जिक्र किया था. हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि क्या यूक्रेन इतनी बड़ी संख्या में फुटेज को एनलाइज कर सकता है या नहीं. यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि अमेरिका और ब्रिटेन के पास लोकेशन का सटीक पता लगने वाले टूल्स मौजूद हैं. दोनों देशों ने यूक्रेन को सर्विलांस ड्रोन की मदद से हाई-रेजॉल्यूशन इमेज प्रोवाइड करवाई थी, जिससे किसी टारगेट की लोकेशन का पता लग सके.
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