Why Stomach Infections Increase In Summer: गर्मी के मौसम में अक्सर ऐसा होता है कि अचानक घर या दफ्तर में कई लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं. किसी को उल्टी, किसी को दस्त, तो किसी को पेट में मरोड़ की शिकायत. ज्यादातर लोग इसे सीधे तौर पर खाने की वजह मान लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. आकाश चौधरी, जो केयर हॉस्पिटल में क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर सलाहकार हैं, उन्होंने TOI को बताया कि जिसे हम आमतौर पर फूड पॉइजनिंग कहते हैं, वह अक्सर कई कारणों का मिला-जुला असर होता है. इसमें गर्मी, खाना रखने का तरीका, पानी की क्वालिटी और आसपास का वातावरण सबकी भूमिका होती है. दरअसल, गर्मी सिर्फ असहज महसूस कराने तक सीमित नहीं है, यह खाने की सुरक्षा पर भी सीधा असर डालती है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. कई बार खाना देखने और सूंघने में बिल्कुल ठीक लगता है, लेकिन उसमें माइक्रोब्स खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके होते हैं. डॉक्टर चौधरी के मुताबिक, गर्मियों में खाना पकने और खाने के बीच थोड़ा सा अंतर भी जोखिम बढ़ा सकता है.
किससे होती है दिक्कत?
लोग अक्सर यह सोचते हैं कि बीमारी सिर्फ खाने से हुई है, लेकिन कई बार असली वजह पानी होता है. पीने का पानी, पेय पदार्थों में डाली गई बर्फ, या कच्चे फल-सब्जियां जिन्हें ठीक से साफ नहीं किया गया, ये सभी इंफेक्शन के सोर्स बन सकते हैं. खास बात यह है कि पानी को लेकर हम उतनी सावधानी नहीं बरतते जितनी खाने को लेकर करते हैं, और यही चूक भारी पड़ जाती है.
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लाइफस्टाइल से भी प्रभाव
गर्मियों में खानपान की आदतें भी बदल जाती हैं. बाहर खाना, यात्रा के दौरान खाना या सड़क किनारे से कुछ लेना ये सब आम हो जाता है. ज्यादातर बार सब ठीक रहता है, लेकिन कभी-कभी इनमें से कोई एक चीज समस्या पैदा कर देती है और यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि असल कारण क्या था. अगर एक ही घर में कई लोग एक साथ बीमार पड़ते हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वजह वही खाना हो. कई बार यह इंफेक्शन एक से दूसरे में फैलता है, जो आमतौर पर वायरस के कारण होता है. गंदे हाथ, साझा सतहें और साफ-सफाई की कमी इसके पीछे बड़ी वजह बनती हैं. डॉक्टर चौधरी साफ कहते हैं कि ऐसे मामलों में बीमारी किसी खास खाने से नहीं, बल्कि संपर्क से फैलती है.
कब डॉक्टर से करना चाहिए संपर्क?
इसके अलावा, गर्मी में शरीर खुद भी ज्यादा दबाव में रहता है. पानी की कमी, अनियमित भोजन और तेज तापमान डाइजेशन सिस्टम को सेंसेटिव बना देते हैं. ऐसे में वही खाना, जो पहले कभी नुकसान नहीं करता था, अब परेशानी पैदा कर सकता है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाती है. लेकिन अगर उल्टी लगातार हो, तेज बुखार हो, मल में खून आए या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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