खाते में आ गए गलती से पैसे? एक भूल और लग सकता है 60% टैक्स और पेनाल्टी का झटका

खाते में आ गए गलती से पैसे? एक भूल और लग सकता है 60% टैक्स और पेनाल्टी का झटका


Bank Account: बैंक खाते में अचानक से पैसे आ जाते हैं तो लोग ज्यादातर असमंजस में पड़ जाते हैं कि क्या इस रकम पर टैक्स लगेगा और उन्हें तुरंत क्या करना चाहिए.

कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि सिर्फ गलती से खाते में पैसे आने पर टैक्स देनदारी नहीं बनती है, लेकिन अगर खाताधारक यह जानने के बाद भी कि पैसा उसका नहीं है, उसका उपयोग करता है, तो यहां सबसे बड़ी समस्या देखने को मिल सकती है. 

क्या गलती से आए पैसे पर लग सकता है टैक्स?

आयकर कानून के मुताबिक, टैक्स आमतौर पर उसी आय पर लगता है जो करदाता की अपनी हो या जिसे वेतन, व्यापार, उपहार या फिर किसी अन्य वैध स्रोतों से कमाया गया हो. हांलाकि, अगर बैंकिंग त्रुटि (Banking Error) की वजह से कोई राशि गलत तरीके से क्रेडिट हो जाती है, तो उसे योग्य आय नहीं माना जाएगा लेकिन प्राप्तकर्ता का उस पर कोई कानूनी दावा नहीं होता है. 

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ऐसे में क्या कहते हैं टैक्स पार्टनर? 

तो वहीं, इस मामले में एन.ए. शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा न जानकारी देते हुए बताया कि टॉक्स सिर्फ और सिर्फ तभी देय होता है जब पैसा वास्तव में करदाता का हो. यानी, अगर कोई गलत क्रेडिट हुआ है और करदाता तुरंत बैंक को लिखित में इसकी सूचना दे देता है, तो उसे टैक्स के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है.

शुरुआत में करदाता को ही टैक्स अधिकारियों के सामने इस जमा राशि की प्रकृति को पूरी तरह से बताना होगा. 

यहां जानें आयकर विभाग की सख्त धाराएं और जुर्माना

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 69A के अनुसार, अगर करदाता पैसे के स्रोत की सही तरीके से व्याख्या नहीं कर पाता है, तो इसे उस वित्तीय साल (Financial Year) की ‘डीम्ड इनकम’ (माना गया धन) मान लिया जाता है. हांलाकि, ऐसी स्थिति में इस राशि पर 60 प्रतिशत की दर से टैक्स, अधिभार (सर्चार्ज) और शिक्षा उपकर लगाया जाता है. 

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पैसे तुरंत आने पर क्या करना चाहिए तुरंत?

सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर कुणाल सवानी और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि अगर आपके खाते में पैसे आ जाते हैं तो उन राशि को भूलकर भी खर्च या फिर ट्रांसफर करने की कोशिश न करें.

दूसरी तरफ तुरंत अपने बैंक को लिखित में या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित करें और शिकायत संदर्भ संख्या (Complaint Reference Number) का रिकॉर्ड को चेक करना न भूलें. इसके अलावा अगर भेजने वाले की पहचान हो जाती है, तो उचित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से राशि को जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी वापस करवा दें. 



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