खेत में लगा सोलर पंप खराब हो गया, कौन उठाएगा रिपेयरिंग का खर्च?

खेत में लगा सोलर पंप खराब हो गया, कौन उठाएगा रिपेयरिंग का खर्च?


Solar Pump Repairing Cost: सिंचाई के लिए पहले किसानों को पुराने तरीकों पर निर्भर रहना होता था. जिसमें डीजल और बिजली की लागत आती थी. लेकिन अब किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई कर रहे हैं. और इसके लिए उन्हें पीएम कुसुम योजना का फायदा भी मिल रहा है. इस योजना के तहत देशभर में लाखों किसान अपने खेतों में सोलर पंप लगवा चुके हैं.

इससे बिजली कटौती और डीजल के बढ़ते खर्च की चिंता काफी कम हुई है. अगर सोलर पंप कभी-कभी चलते बंद हो जाए या उसमें कोई तकनीकी खराबी आ जाए. तो ऐसे में किसानों के मन में सवाल उठता है कि उसका खर्चा कौन उठाएगा.  

क्या उसकी रिपेयरिंग के लिए किसान को अपनी जेब से पैसे देने होंग  या फिर इसकी जिम्मेदारी कंपनी और सरकार की होगी? अगर आपके खेत में लगा सोलर पंप खराब हो गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. मरम्मत का खर्च किसकी जिम्मेदारी होती है और किन परिस्थितियों में किसान को भुगतान करना पड़ सकता है और शिकायत दर्ज कराने का सही तरीका क्या है जान लें.

 

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5 साल की वारंटी में फ्री रिपेयरिंग 

अगर आपने किसी सरकारी योजना के तहत खेत में सोलर पंप लगवाया है. तो फिर आपको  इस पर 5 साल तक की कॉम्प्रिहेंसिव वारंटी मिलती है. यानी इंस्टॉलेशन की तारीख से अगले 5 साल तक पंप, मोटर, कंट्रोलर या सोलर पैनल में तकनीकी खराबी आने पर रिपेयरिंग का खर्च किसान को नहीं उठाना पड़ता. जरूरत पड़ने पर खराब पार्ट को बदलने का खर्च भी वेंडर कंपनी की जिम्मेदारी होती है.

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय यानी MNRE की गाइडलाइंस के तहत वारंटी के दौरान सोलर पंप की मेंटेनेंस और सर्विस का जिम्मा संबंधित वेंडर पर रहता है. यानी खराबी आने पर किसान को खुद मैकेनिक बुलाने या सर्विस का चार्ज देने की जरूरत नहीं होती. कंपनी की सर्विस टीम को मौके पर पहुंचकर समस्या चेक करनी होती है और जरूरी रिपेयरिंग करनी होती है.

हालांकि फ्री वारंटी हर तरह के नुकसान पर लागू नहीं होती. अगर पंप में खराबी सामान्य तकनीकी वजह से आई है. तो रिपेयरिंग का खर्च कंपनी उठाएगी. लेकिन चोरी, जानबूझकर नुकसान पहुंचाने या गलत इस्तेमाल से हुई खराबी के मामले में नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए पंप लगवाते समय मिली वारंटी और मेंटेनेंस से जुड़ी शर्तों को संभालकर रखना जरूरी है.

पंप खराब होते ही ऐसे दर्ज करें शिकायत

सोलर पंप में खराबी आते ही किसान को तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए. इसके लिए MNRE या अपने राज्य की संबंधित एजेंसी के टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 पर संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा कई मामलों में कंपनी के सर्विस पोर्टल या ऐप के जरिए भी ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज करने की सुविधा मिलती है. शिकायत दर्ज होने के बाद किसान को एक टोकन या कंप्लेंट नंबर दिया जाता है. इसे संभालकर रखना जरूरी है क्योंकि आगे शिकायत का स्टेटस इसी नंबर से ट्रैक किया जा सकता है.

नियमों के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद कंपनी की सर्विस टीम को तय समयसीमा में खेत पर पहुंचकर सोलर पंप की जांच करनी होती है. अगर कंट्रोलर, इन्वर्टर, मोटर या किसी दूसरे पार्ट में तकनीकी खराबी मिलती है. तो वारंटी के तहत उसकी रिपेयरिंग या पार्ट रिप्लेसमेंट किया जाता है. वहीं सोलर मॉड्यूल या पैनल में बड़ी खराबी होने पर उसे बदलने की प्रक्रिया भी कंपनी की जिम्मेदारी होती है. इसलिए पंप खराब होने पर किसान को तुरंत किसी लोकल मैकेनिक को बुलाकर अपनी जेब से पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. पहले शिकायत दर्ज करें और कंप्लेंट नंबर के जरिए कार्रवाई का अपडेट लेते रहें.

खेत में लगा सोलर पंप खराब हो गया, कौन उठाएगा रिपेयरिंग का खर्च?

5 साल बाद रिपेयरिंग का खर्च कौन उठाएगा?

सोलर पंप की 5 साल की वारंटी पूरी होने के बाद फ्री सर्विस की सुविधा खत्म हो जाती है. इसके बाद पंप में कोई तकनीकी खराबी आती है. तो रिपेयरिंग और पार्ट्स बदलने का खर्च आमतौर पर किसान को खुद उठाना पड़ता है. हालांकि सोलर पैनल की परफॉर्मेंस वारंटी कई मामलों में करीब 25 साल तक रहती है. वहीं मोटर, कंट्रोलर और दूसरे इलेक्ट्रिकल पार्ट्स की वारंटी अलग हो सकती है. इसलिए पंप लगवाते समय वारंटी की शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है.

5 साल बाद किसान चाहे तो कंपनी के साथ AMC यानी Annual Maintenance Contract भी ले सकता है. इसके तहत सालाना एक तय फीस देकर पंप की नियमित सर्विस और मेंटेनेंस कराई जा सकती है. इससे अचानक आने वाली तकनीकी दिक्कतों को समय पर ठीक कराने में आसानी रहती है.

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