गजब! Humanoid Robot ने फतह किया 20,341 फीट ऊंचा ज्वालामुखी, अब इस चोटी पर है नजर

गजब! Humanoid Robot ने फतह किया 20,341 फीट ऊंचा ज्वालामुखी, अब इस चोटी पर है नजर


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट है, पर कानूनी अड़चनें हैं।

Humanoid Robot: ह्यूमनॉइड रोबोट ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक माने जाने वाले इक्वाडोर के चिम्बोराजो ज्वालामुखी की चोटी तक पहुंचकर नया इतिहास रच दिया है. इस उपलब्धि को रोबोटिक्स की दुनिया में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य रोबोट्स को प्रयोगशालाओं और नियंत्रित वातावरण से बाहर निकालकर वास्तविक और कठिन परिस्थितियों में परखना है.

20,341 फीट (करीब 6,200 मीटर) ऊंचे इस ज्वालामुखी पर चढ़ने वाला रोबोट यूनिट्री G1 का संशोधित एडिशन है जिसे पेम्बा नाम दिया गया है. यह अभियान एक बड़े रोबोटिक्स मिशन की पहली सीढ़ी माना जा रहा है जिसका अंतिम लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट तक पहुंचना है.

सिर्फ करतब दिखाने के लिए नहीं बना यह रोबोट

आजकल सोशल मीडिया पर अक्सर रोबोट्स के नाचने, दौड़ने या जिमनास्टिक करते हुए वीडियो वायरल होते रहते हैं. लेकिन पेम्बा का उद्देश्य इससे कहीं अलग है. इस परियोजना का मुख्य सवाल यह है कि क्या ह्यूमनॉइड रोबोट उन खतरनाक और दूरस्थ क्षेत्रों में काम कर सकते हैं जहां इंसानों के लिए जाना जोखिम भरा होता है और पुरानी मशीनें प्रभावी साबित नहीं हो पातीं.

जंगलों और दुर्गम इलाकों के लिए तैयार किया गया सिस्टम

Interesting Engineering की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का नेतृत्व इंजीनियर और Geologic Dome के संस्थापक पाब्लो बेरलांगा बोएमारे कर रहे हैं. इससे पहले वे वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय परियोजनाओं पर काम कर चुके हैं.

उनके अनुसार, दुनिया के कई संरक्षित जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों की निगरानी के लिए हजारों स्थिर कैमरे और सेंसर लगाए जाते हैं. इनकी मदद से वन्यजीवों की एक्टिविटी, अवैध कटाई, शिकार और पर्यावरणीय बदलावों पर नजर रखी जाती है.

टीम का मानना है कि भविष्य में कैमरों और सेंसरों से लैस मोबाइल रोबोट इन कामों को ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकते हैं. ऐसे रोबोट बड़े क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से घूमकर डेटा एकत्र कर सकेंगे और सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए जानकारी भेज सकेंगे. भविष्य में इन्हें सौर ऊर्जा से संचालित करने की भी योजना है.

अब नजरें माउंट एवरेस्ट पर

इस परियोजना का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य हिमालय की चोटियों तक पहुंचना है. Geologic Dome और नेपाल की Fourteen Peaks Expedition नामक संस्था मिलकर माउंट एवरेस्ट पर रोबोट भेजने की योजना पर काम कर रही हैं.

प्रस्तावित मिशन के तहत रोबोट को एवरेस्ट बेस कैंप से लेकर कैंप-IV तक भेजा जा सकता है जो लगभग 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

इस दौरान वैज्ञानिक बैटरी परफॉर्मेंस, रोबोट की चाल, जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव और कठिन मौसम में उसकी कार्यक्षमता से जुड़ा डेटा एकत्र करेंगे.

एवरेस्ट मिशन में कानूनी अड़चन

हालांकि एवरेस्ट अभियान की तैयारी चल रही है लेकिन इसके सामने एक बड़ी रूकावट भी आ गई है. नेपाल में फिलहाल ऐसे किसी कानून या नियम का अभाव है जो रोबोट्स के एवरेस्ट अभियान को कंट्रोल करता हो. इसी वजह से स्थानीय अधिकारियों ने पहले आवश्यक नियम बनाने की बात कही है. जब तक नए दिशा-निर्देश तैयार नहीं हो जाते तब तक एवरेस्ट मिशन को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा.

क्या एवरेस्ट तक पहुंचेगा पेम्बा?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेम्बा माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंच पाएगा या नहीं. लेकिन चिम्बोराजो ज्वालामुखी पर उसकी सफल चढ़ाई ने यह साबित कर दिया है कि ह्यूमनॉइड रोबोट अब प्रयोगशाला की सीमाओं से बाहर निकलकर पृथ्वी के सबसे कठिन इलाकों में भी अपनी क्षमता दिखाने लगे हैं.

यह भी पढ़ें:

क्या Airplane Mode सच में रोक देता है Smartphone Radiation? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे





Source link