How To Make Your Home Baby Proof: घर में छोटा बच्चा आते ही माता-पिता की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ जाती हैं. बच्चे स्वभाव से बेहद चंचल होते हैं और आसपास की हर चीज को छूकर, पकड़कर और मुंह में डालकर समझने की कोशिश करते हैं. यही उनकी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन कई बार घर की सामान्य चीजें भी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही समय पर बेबी प्रूफिंग करना बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है.
बेबी प्रूफिंग का क्या होता है मतलब?
डॉक्टरों के मुताबिक, बेबी प्रूफिंग का मतलब घर को इस तरह तैयार करना है कि बच्चा बिना चोट या खतरे के सुरक्षित तरीके से खेल और सीख सके. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इसकी शुरुआत बच्चे के जन्म से पहले ही कर देनी चाहिए. क्योंकि शुरुआती दिनों में माता-पिता को रात में अंधेरे में बच्चे को गोद में लेकर चलना पड़ सकता है, ऐसे में घर में फैले वायर, फिसलन या नुकीली चीजें हादसे का कारण बन सकती हैं.
किन चीजों का रखना होता है ध्यान?
बच्चों के बारे में तरह- तरह की जानकारी देने वाली बेवसाइट drgolly के अनुसार, घर में मौजूद ट्रिप हैजर्ड्स, खुले इलेक्ट्रिक कॉर्ड्स, शार्प कॉर्नर्स और खिड़कियों की सुरक्षा पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए. बेबी क्रिब और नर्सरी फर्नीचर भी पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए. इसके अलावा जहां संभव हो, कॉर्डलेस विंडो कवरिंग्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है ताकि बच्चा उनमें उलझ न सके.
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किस उम्र के बच्चों को सेफ्टी की सबसे ज्यादा जरूरत?
जब बच्चा घुटनों के बल चलना या खुद खड़े होकर चलना शुरू करता है, तब घर को और ज्यादा सुरक्षित बनाने की जरूरत पड़ती है. डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टेज पर कपबोर्ड और ड्रॉअर्स में चाइल्ड लॉक लगाना जरूरी हो जाता है. इसके साथ ही इलेक्ट्रिक सॉकेट्स को कवर करना और भारी फर्नीचर को दीवार से फिक्स करना चाहिए ताकि बच्चा उन्हें खींचकर अपने ऊपर न गिरा ले. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सीढ़ियों के ऊपर और नीचे सेफ्टी गेट लगाना सबसे जरूरी सुरक्षा उपायों में से एक है.
इसके अलावा किचन, बाथरूम, लॉन्ड्री एरिया और बालकनी जैसी जगहों पर भी गेट लगाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यहां गर्म चीजें, केमिकल्स और फिसलन का खतरा ज्यादा होता है. इसके साथ ही पालतू जानवरों के खाने की जगह और फायरप्लेस जैसी जगहों को भी बच्चे की पहुंच से दूर रखना जरूरी है. डॉक्टरों का कहना है कि CPR और फर्स्ट एड की बेसिक ट्रेनिंग लेना भी बेहद जरूरी है. इसके साथ ही घर और कार में फर्स्ट एड किट हमेशा तैयार रखनी चाहिए.
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