दरगाह के पास दीपक जलाने की अनुमति दिए जाने के खिलाफ SC पहुंची विजय सरकार, जानें पूरा मामला

दरगाह के पास दीपक जलाने की अनुमति दिए जाने के खिलाफ SC पहुंची विजय सरकार, जानें पूरा मामला


तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें राज्य में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति दी गई थी. सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार के वकील बी. करुणाकरन के माध्यम से 11 जून को यह याचिका दाखिल की.

वकील ने पुष्टि की कि यह याचिका मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 जनवरी के उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें सिंगल बेच के एक दिसंबर 2025 के फैसले को बरकरार रखा गया था. उस आदेश में कहा गया था कि त्योहार के दिन पारंपरिक रूप से दीप जलाया जाएगा.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने 6 जनवरी के अपने आदेश में कहा था कि इस धार्मिक प्रथा को लेकर कानून-व्यवस्था की जो आशंका जताई जा रही है, वह केवल एक काल्पनिक डर है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिस स्थान पर पत्थर का स्तंभ (दीपस्तंभ/दीपथूण) स्थित है, वह श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर की संपत्ति है और वर्तमान में वक्फ बोर्ड का इस मामले में कोई अधिकार नहीं बनता.

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘यह मानना मुश्किल और हास्यास्पद है कि अपने क्षेत्राधिकार में स्थित मंदिर की भूमि पर वर्ष में एक विशेष दिन मंदिर प्रतिनिधियों द्वारा दीप जलाने से सार्वजनिक शांति भंग हो जाएगी.’ हाईकोर्ट ने अपने आदेश में का कि ऐसा सिर्फ तभी हो सकता है जब ऐसी अशांति स्वयं राज्य प्रायोजित करे. हम प्रार्थना करते है कि कोई भी राज्य राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस स्तर तक नहीं गिरे.’

यह मामला राम रविकुमार और अन्य की याचिका से जुड़ा है, जिसमें हर साल कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी स्थित प्राचीन पत्थर स्तंभ पर पवित्र दीप जलाने की अनुमति देने की मांग की गई थी. एक दिसंबर 2025 को एकल न्यायाधीश ने याचिका स्वीकार करते हुए त्योहार के दिन दीप जलाने का आदेश दिया था.

तत्कालीन द्रमुक सरकार, मंदिर प्रबंधन और थिरुपरनकुंद्रम स्थित हजरत सुल्तान सिकंदर बधुशा औलिया दरगाह ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. राज्य सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा था कि पहाड़ी के शिखर पर, जो दरगाह के पास स्थित है, दीप जलाने से सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि वक्फ बोर्ड का इस मामले में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है. सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड की ओर से यह दावा किया गया था कि दीपस्तंभ दरगाह का है, जिसे अदालत ने भ्रामक और अनुचित टिप्पणी बताया.



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