पाकिस्तान ने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए तुर्की के साथ कथित तौर पर बड़ी डील कर चीन को बड़ा झटका दे दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद 65 KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीद सकता है, जिससे क्षेत्रीय रक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. तुर्की के एक डिफेंस जर्नलिस्ट ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच 65 KAAN पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स की खरीद को लेकर समझौता हुआ है. अगर यह सौदा आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक और तुर्की के लिए उसके स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम KAAN की सबसे बड़ी निर्यात सफलता साबित हो सकती है.
क्या है KAAN फाइटर जेट कार्यक्रम?
KAAN, जिसे पहले TF-X या MMU कार्यक्रम के नाम से भी जाना जाता था, तुर्की का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है. इसे अत्याधुनिक एयर सुपरियोरिटी मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें लो-ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ फीचर्स, एडवांस एवियोनिक्स सिस्टम और शक्तिशाली इंजन लगाए गए हैं.
यह परियोजना तुर्की के लिए बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि इसके जरिए अंकारा विदेशी रक्षा आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चाहता है और अपने घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
idrw.org नाम की वेबसाइट के मुताबिक, अगर पाकिस्तान वास्तव में 65 KAAN फाइटर जेट खरीदता है, तो यह उसकी वायुसेना की क्षमताओं में बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जाएगा. आधुनिक स्टेल्थ प्लेटफॉर्म पाकिस्तान की एयर पावर और क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को काफी मजबूत कर सकते हैं.
पाकिस्तान पहले से ही तुर्की के साथ कई रक्षा परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है. दोनों देशों ने JF-17 फाइटर जेट कार्यक्रम में भी साथ काम किया है. ऐसे में KAAN सौदा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है.
अभी तक नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि
हालांकि इस कथित डील को लेकर अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR), तुर्की की Turkish Aerospace Industries (TAI) और अंकारा के रक्षा मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है. यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ फिलहाल इस खबर को सावधानी से देखने की सलाह दे रहे हैं.
पाकिस्तान पहले से KAAN कार्यक्रम में शामिल
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान कई वर्षों से KAAN कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल रहा है. बताया जाता है कि पाकिस्तानी इंजीनियर इस परियोजना के विकास कार्य में योगदान दे रहे हैं और दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन सुविधा स्थापित करने पर भी चर्चा चल रही है. अगर यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो इससे तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय असेंबली और दीर्घकालिक औद्योगिक लाभ दोनों देशों को मिल सकते हैं.
तुर्की की वैश्विक रक्षा महत्वाकांक्षा
तुर्की फिलहाल KAAN फाइटर जेट को मित्र देशों के बीच सक्रिय रूप से प्रमोट कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ भी बड़े निर्यात समझौतों पर बातचीत चल रही है, जबकि अजरबैजान ने भी तुर्की की स्टेल्थ तकनीक में गहरी रुचि दिखाई है. अगर पाकिस्तान के साथ यह सौदा आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाता है, तो इससे वैश्विक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बाजार में तुर्की की स्थिति और मजबूत होगी.
क्यों बरतनी होगी सावधानी?
हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रक्षा मामलों पर केंद्रित प्लेटफॉर्म्स ने इस दावे को तेजी से फैलाया है, लेकिन इतनी बड़ी रक्षा खरीद आमतौर पर लंबे समय तक चलने वाली बातचीत, फंडिंग व्यवस्था और सरकारी मंजूरी के बाद ही अंतिम रूप लेती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की डील को पूरी तरह गुप्त रखना आसान नहीं होता. इसलिए अब सभी की नजर तुर्की और पाकिस्तान की ओर से आने वाले किसी आधिकारिक बयान पर टिकी हुई है, जो 65 KAAN फाइटर जेट्स के लिए कथित 15 अरब डॉलर की इस डील की पुष्टि या स्थिति स्पष्ट कर सके.





