बच्चे के लिए कितना जरूरी है मां का दूध, इसमें कितना पोषण?

बच्चे के लिए कितना जरूरी है मां का दूध, इसमें कितना पोषण?


World Breastfeeding Week 2026: हर साल 1 से 7 अगस्त तक दुनियाभर में वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है. इस हफ्ते को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मां के दूध के फायदों के बारे में जागरूक करना होता है. इस साल वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2026 की थीम है “ब्रेस्टफीडिंग फॉर अ सस्टेनेबल स्टार्ट इन लाइफ: स्ट्रेंथन व्हाट वर्क्स”. इसका उद्देश्य उन तरीकों को और बेहतर बनाना है, जो पहले से ही स्तनपान बढ़ाने में सफल साबित हुए हैं.

WHO के मुताबिक बच्चे को जन्म के बाद पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए. इस दौरान बच्चे को न तो पानी की जरूरत होती है और न ही शहद, गाय का दूध या कोई दूसरी चीज देने की जरूरत होती है, क्योंकि मां का दूध ही बच्चे की सारी जरूरतें पूरी कर देता है. जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, बच्चे के लिए बहुत खास होता है. इसमें एंटीबॉडी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो नवजात बच्चे को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर हमेशा सलाह देते हैं कि जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध पिलाना बहुत जरूरी होता है.

मां के दूध में कितना पोषण होता है

माना जाता है कि बच्चे को करीब 6 महीने तक मां के दूध के अलावा कुछ भी नहीं खिलाना या पिलाना चाहिए. मां का दूध ही एक तरह से बच्चे का भरपूर भोजन होता है. एक रिपोर्ट के अनुसार इसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स सही मात्रा में मौजूद होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और दिमागी विकास के लिए जरूरी हैं. मां के दूध में मौजूद फैट बच्चे के दिमाग को बढ़ने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं को बनाने में काम आता है. इसमें लैक्टोज नाम की शक्कर भी होती है, जो बच्चे को ऊर्जा देती है.

सबसे खास बात यह है कि मां के दूध में एंटीबॉडी और व्हाइट ब्लड सेल्स होती हैं, जो बच्चे के शरीर में इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती हैं. इसी वजह से मां का दूध पीने वाले बच्चों को डायरिया, निमोनिया और कान के संक्रमण जैसी बीमारियां कम होती हैं. WHO और यूनिसेफ की सलाह है कि बच्चे को कम से कम 2 साल की उम्र तक मां का दूध देना चाहिए, भले ही 6 महीने के बाद उसे ऊपर का खाना देना शुरू कर दिया जाए.

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मां और बच्चे दोनों को मिलता है फायदा

मां का दूध सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. स्तनपान कराने से मां के शरीर में ऐसे हार्मोन बनते हैं, जो डिलीवरी के बाद गर्भाशय को जल्दी सामान्य होने में मदद करते हैं. इसके अलावा जो महिलाएं लंबे समय तक स्तनपान कराती हैं, उनमें आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर और ओवरी कैंसर का खतरा भी कुछ हद तक कम हो जाता है. स्तनपान के दौरान मां और बच्चे के बीच जो शारीरिक नजदीकी बनती है, वह दोनों के भावनात्मक रिश्ते को भी मजबूत करती है.

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