भारत सरकार ने पासपोर्ट को लेकर बड़ा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है. इसे नागरिकता साबित करने का अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता. सरकार ने पासपोर्ट और मोबिलिटी सिस्टम को लेकर एक विस्तृत जानकारी दी. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट भारत सरकार की तरफ से उन लोगों को दिया जाता है जो भारतीय नागरिक होते हैं, लेकिन इसका मुख्य काम विदेश यात्रा को आसान बनाना और दूसरे देशों में पहचान के रूप में इस्तेमाल होना है. हालांकि, इस बीच भारत की पासपोर्ट रैकिंग की बात करें तो हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के लेटेस्ट एडिशन के अनुसार, भारत दुनियाभर में 80वें स्थान पर है. पासपोर्ट रैंकिंग से जुड़े मामले में भी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हालत बदतर है. इस मामले पाकिस्तान 100वें नंबर पर है और महज 30 ऐसे देश है, जहां पड़ोसी मुल्क के लोग फ्री वीजा ट्रैवल कर सकते हैं.
भारतीय पासपोर्ट होल्डर्स को दुनियाभर में दर्जनों जगहों पर वीजा-फ्री, वीजा-ऑन-अराइवल या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) की सुविधा मिलती है. मौजूदा स्थिति 2025 में 85वें स्थान से बेहतर है, लेकिन, भारत अभी भी दुनिया के सबसे मजबूत पासपोर्ट वाले देशों से काफी पीछे है. लेटेस्ट रैंकिंग के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट होल्डर बिना वीजा के 56 देशों की यात्रा कर सकते हैं, जबकि 170 देशों के लिए वीजा की जरूरत होती है. इनमें से ज्यादातर वीजा-फ्री देश अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्वी देश हैं.
रैंकिंग में सुधार के बावजूद उतार-चढ़ाव
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के पुराने डेटा से पता चलता है कि भारत की रैंकिंग में लगातार सुधार होने के बजाय उतार-चढ़ाव आते रहे हैं. 2006 में भारत 71वें स्थान पर था. अगले कुछ सालों में रैंकिंग धीरे-धीरे गिरी. 2012 में यह 82वें स्थान पर पहुंच गई. इसके बाद थोड़ी रिकवरी हुई, लेकिन, दशक के बीच में भारत की रैंकिंग फिर गिरी. साल 2015 में रैंकिंग 88वें पायदान पर पहुंच गई. यह इंडेक्स के इतिहास में इसके सबसे खराब परफॉर्मेंस में से एक था. इसके बाद पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार हुआ. 2018 में यह 81वें स्थान पर पहुंच गया, लेकिन, कोरोना की महामारी के दौरान यह फिर से नीचे आ गया.
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