भारत में अब कितनी जमीन पर हो रही खेती, 50 साल में कितनी घटी

भारत में अब कितनी जमीन पर हो रही खेती, 50 साल में कितनी घटी


Farming News: भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां आज भी बड़ी आबादी की कमाई खेती से जुड़ी हुई है. लेकिन पिछले कुछ दशकों में आबादी में काफी तेजी से बढ़ी है. और शहरों में भी विस्तार हुआ है. इस वजह से खेती के लिए जमीन में भी कमी आई है. अगर पिछले 50 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि देश में खेती के लिए मौजूद जमीन का दायरा लगातार घटा है. 

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आज के वक्त में भारत में कितनी जमीन पर खेती हो रही है और पिछले पांच दशकों यानी 50 सालों में खेती का कितना हिस्सा कम हुआ है. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी. 

आज भारत में कितनी जमीन पर हो रही है खेती?

अगर अभी के हालात देखें तो भारत की कुल जमीन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी तौर पर खेती के काम आता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन करीब 15.5 से 16 करोड़ हेक्टेयर के आसपास है. 

जबकि हर साल जिस जमीन पर फसल उगाई जाती है. उसका एरिया लगभग 14 करोड़ हेक्टेयर के करीब है. खेती के लिए मौजूद जमीन के मामले में भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है और अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आता है. यही वजह है कि देश को अपनी अनाज जरूरत के लिए बाहर से इंपोर्ट करने की जरूरत नहीं पड़ती है. 

बढ़ती आबादी और जमीन के लगातार बंटवारे की वजह से हर किसान के हिस्से में आने वाली खेती की जमीन कम होती जा रही है. आज देश के ज्यादातर किसानों के पास एवरेज एक या दो हेक्टेयर से भी कम जमीन बची है. ऐसे में छोटे खेत से ज्यादा पैदावार लेना, लागत निकालना और परिवार का खर्च चलाना किसानों के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो गया है.

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50 सालों में कितना घटा खेती का रकबा?

अगर पिछले 50 सालों का रिकॉर्ड देखें तो हालात बहुत अच्छे नजर नहीं आते हैं. सत्तर के दशक में देश में खेती के लिए ज्यादा जमीन उपलब्ध थी. लेकिन समय के साथ लाखों हेक्टेयर खेती वाली जमीन दूसरे कामों में इस्तेमाल होने लगी. अनुमान के मुताबिक बीते पांच दशकों में करीब 20 से 25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन गैर कृषि इस्तेमाल में चली गई. 

इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ते शहर, नए हाईवे, एक्सप्रेसवे, हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्रियल एरिया का विस्तार रहा है. इसके अलावा रासायनिक खादों का ज्यादा इस्तेमाल, गिरता भूजल स्तर और मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता भी खेती के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. 

कई इलाकों में जमीन की पैदावार क्षमता कम होने से किसानों को खेती छोड़ने तक की नौबत आ गई. पहले जहां परिवारों के पास खेती के लिए ज्यादा जमीन हुआ करती थी, वहीं अब जमीन के छोटे छोटे हिस्सों में बंटने और बढ़ते निर्माण कार्यों की वजह से खेती का दायरा लगातार सीमित होता जा रहा है.

भारत में अब कितनी जमीन पर हो रही खेती, 50 साल में कितनी घटी

खेती की जमीन कम होने का क्या असर पड़ेगा?

खेती की जमीन का कम होना आने वाले समय के लिए एक बड़ी चुनौती का बनकर आ सकता है. जब अच्छी पैदावार देने वाली जमीन पर मकान, फैक्ट्री और दूसरे चीजों का कंस्ट्रक्शन हो जाता है. तो उसे दोबारा खेती के लायक बनाना बेहद मुश्किल होता है. 

दूसरी तरफ कम जमीन में ज्यादा उत्पादन लेने के दबाव में कई किसान केमिकल खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. जिससे मिट्टी की सेहत पर असर पड़ रहा है. अगर खेती की जमीन इसी तरह कम होती रही. तो आने वाले समय में बढ़ती आबादी के लिए अनाज मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बन सकता है. 

इस समस्या से निपटने के लिए अब वर्टिकल फार्मिंग, ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट फार्मिंग और दूसरी नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. तो इसके साथ ही जरूरी है कि अच्छी खेती वाली जमीन को गैर कृषि कामों में इस्तेमाल करने से बचाया जाए. जिससे खेती सुरक्षित रहेगी. 

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