राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवालों के बीच VHP का बड़ा बयान, अध्यक्ष आलोक कुमार ने किया बचाव, विपक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवालों के बीच VHP का बड़ा बयान, अध्यक्ष आलोक कुमार ने किया बचाव, विपक्ष


विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से जांच को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों और विपक्ष के रवैये पर बयान दिया है. आलोक कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले से यह साफ हो गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के ट्रस्टी पूरी गंभीरता के साथ चाहते हैं कि अयोध्या में जो भी घटना हुई है, उसकी निष्पक्ष जांच हो और जल्द से जल्द सच्चाई सामने आए. उन्होंने कहा कि जैसे ही मामला ट्रस्ट के ध्यान में आया, ट्रस्टियों ने तुरंत प्राथमिक जांच कराई. इस जांच में कुछ लोगों की गलती सामने आई, जिसके बाद 80 लाख रुपये वापस कराए गए. इसके बाद ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री से SIT बनाने की मांग की.

आलोक कुमार के मुताबिक जब SIT अयोध्या पहुंची, तब चंपत राय  ने खुद कहा कि वह महामंत्री हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए. उन्होंने जांच टीम से कहा कि सबसे पहले उनसे सवाल-जवाब किए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद जब रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली, तो ट्रस्टियों ने पहला कदम FIR दर्ज कराने का उठाया. FIR में SIT जांच में शामिल 8 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही अन्य लोगों का भी जिक्र किया गया है. ट्रस्ट ने साफ तौर पर कहा है कि पूरे मामले की पूरी और गहराई से जांच होनी चाहिए.

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 चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया

आलोक कुमार ने कहा कि जब यह बात सामने आई कि चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है, तब दोनों ने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इससे जांच को तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया. उन्होंने कहा कि ये चार बड़े कदम दिखाते हैं कि ट्रस्ट पूरी ईमानदारी से चाहता है कि दोषी लोगों की पहचान हो और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.

आलोक कुमार ने विपक्ष पर निशाना साधा

विपक्ष पर निशाना साधते हुए आलोक कुमार ने कई पुराने राजनीतिक मामलों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे, उन पर आरोप लगे, गिरफ्तारी हुई और जमानत भी खारिज हुई, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया और कहा कि वह जेल से ही काम करते रहेंगे. उन्होंने आगे कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव अल्पमत में आ गए थे, तब JMM सांसदों को रिश्वत देने का मामला सामने आया, लेकिन उन्होंने भी इस्तीफा नहीं दिया. आलोक कुमार ने राजीव गांधी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बोफोर्स मामले में 64 करोड़ रुपये के आरोप लगे, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया गया. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी जमानत पर बाहर हैं, लेकिन उन्होंने भी इस्तीफा नहीं दिया. आलोक कुमार ने कहा कि यही फर्क है चंपत राय के व्यवहार और कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के रवैये में.

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