खेती में बुनियादी सुधार लाने के लिए सरकार किसानों को सोलर कोल्ड रूम बनवाने या खरीदने पर भारी आर्थिक मदद दे रही है. राष्ट्रीय बागवानी मिशन और विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाओं के तहत किसानों को इसकी कुल लागत पर 35% से लेकर 50% तक की सब्सिडी मिलती है. पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सब्सिडी 65% तक भी चली जाती है.

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि एक सोलर कोल्ड रूम बनाने में कितना खर्चा आता है. आमतौर पर 5 से 10 मीट्रिक टन क्षमता वाले सोलर कोल्ड स्टोरेज की कुल लागत करीब 8 लाख से 15 लाख रुपये के बीच बैठती है. अगर आपको 50% तक की सब्सिडी मिल जाती है. तो किसान को अपनी जेब से केवल आधी रकम ही लगानी पड़ती है.

सोलर कोल्ड रूम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे चलाने के लिए आपको ग्रिड की बिजली या महंगे डीजल जनरेटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. इसमें लगे सोलर पैनल दिनभर धूप से बिजली बनाते हैं और इसमें लगी थर्मल बैटरी बैकअप रात में भी तापमान को एकदम ठंडा बनाए रखती है. इससे हर महीने बिजली का बिल जीरो आता है.

इस कोल्ड स्टोरेज में किसान अपनी हरी मिर्च, टमाटर, गोभी, सेब और आम जैसे फल-सब्जियों को कई दिनों या हफ़्तों तक एकदम ताजा रख सकते हैं. जब बाजार में आवक ज्यादा हो और दाम गिरे हुए हों तब किसान अपनी फसल इसमें सुरक्षित रख सकते हैं. बाद में जब बाजार में मांग बढ़े और सही रेट मिले तब इसे निकालकर अच्छे मुनाफे पर बेच सकते हैं.

इस सरकारी योजना का लाभ व्यक्तिगत किसान के साथ-साथ किसानों के समूह, स्वयं सहायता समूह और FPO यानी किसान उत्पादक संगठन भी उठा सकते हैं. अगर किसान समूह बनाकर आवेदन करते हैं तो सरकार उन्हें प्राथमिकता देती है और प्रोजेक्ट पास होना काफी आसान हो जाता है. इससे छोटे और सीमांत किसानों पर व्यक्तिगत रूप से लागत का ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता.

सोलर कोल्ड रूम पर सब्सिडी का फायदा उठाने के लिए किसान को अपने राज्य के बागवानी विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होता है. आवेदन के लिए किसान का आधार कार्ड, जमीन के खसरा-खतौनी के कागजात, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर जैसे बुनियादी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है.

कागजी कार्रवाई और जमीन का भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद विभाग प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे देता है. इसके बाद स्वीकृत वेंडर से सोलर कोल्ड रूम इंस्टॉल कराने पर सब्सिडी की राशि सीधे किसान या संगठन के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. तो अगर आप भी अपनी फसल को खराब होने से बचाना चाहते हैं तो यह काम जरूर करें.

तकनीक की बात करें तो सोलर कोल्ड रूम की लाइफ काफी लंबी होती है और इसका रखरखाव भी बहुत आसान होता है. इसके पैनल और मशीनरी सालों-साल बिना किसी बड़े ब्रेकडाउन के काम करते हैं. जिससे किसानों को बार-बार मरम्मत का खर्चा नहीं उठाना पड़ता. यह इको-फ्रेंडली होने के साथ-साथ किसानों को लंबे वक्त तक आर्थिक मजबूती भी प्रदान करता है.
Published at : 28 Jul 2026 02:07 PM (IST)






