- देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तीसरी बार बढ़ीं, 5 रुपये तक उछाल.
- अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाला गया.
- रुपया कमजोर, आयात लागत बढ़ी, महंगाई पर असर.
- 15 मई से अब तक 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी.
Petrol-Diesel Price Today on May 24: देश में शनिवार को 10 दिन से भी कम समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तीसरी बार बढ़ाई गईं, जिससे रिटेल स्तर पर ईंधन की कीमतों में कुल बढ़ोतरी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर हो गई. कल पेट्रोल की कीमतें 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 91 पैसे तक बढ़ाई गईं.
रिटेल ईंधन की कीमतों में लंबे समय तक कोई बदलाव न होने के बाद लगातार की गई यह बढ़ोतरी सरकारी कंपनियों की ओर से बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालने की एक कोशिश है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, रिफाइनिंग मार्जिन कम हो रहा है और रुपया कमजोर हुआ है, जिससे आयात की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है.
शहरवार पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमतें
| शहर | पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) | डीजल की कीमत (प्रति लीटर) |
| दिल्ली | 99.51 रुपये | 92.70 रुपये |
| मुंबई | 108.45 रुपये | 92.49 रुपये |
| कोलकाता | 110.64 रुपये | 97.02 रुपये |
| चेन्नई | 105.33 रुपये | 97.00 रुपये |
| बेंगलुरु | 108.09 रुपये | 95.99 रुपये |
| भोपाल | 111.71 रुपये | 96.85 रुपये |
| भुवनेश्वर | 105.95 रुपये | 97.59 रुपये |
| चंडीगढ़ | 98.97 रुपये | 86.94 रुपये |
| देहरादून | 97.95 रुपये | 93.23 रुपये |
10 दिनों में कब और कितनी बढ़ी कीमतें?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें 15 मई को 3 रुपये प्रति लीटर और 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गईं. इस ताज़ा बढ़ोतरी के साथ 15 मई को सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा कीमतों में बदलाव पर लगी रोक हटाने के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक लगभग 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई हैं. इससे पूरी अर्थव्यवस्था में महंगाई के दबाव और परिवहन लागत में बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
बता दें कि पंप पर ईंधन की कीमतें वैश्विक, आर्थिक और घरेलू कारकों के मेल से तय होती हैं. इसके मूल में कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत है – जो पेट्रोल और डीजल दोनों के लिए एक मुख्य कच्चा माल है – और जिसका उपभोक्ताओं द्वारा अंततः चुकाई जाने वाली कीमत पर सबसे बड़ा असर पड़ता है.
रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट एक और अहम कारक है क्योंकि भारत कच्चे तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है. जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोरर होता है, तो कच्चा तेल खरीदने की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है.
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