तीन जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था लगभग अंतिम चरण में पहुंच गई है. यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू से कश्मीर तक कई संवेदनशील स्थानों की पहचान की है. इन स्थानों पर अब अस्थायी पिकेट (टेंपरेरी पिकेट्स) बनाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी सुरक्षा चुनौती से तुरंत निपटा जा सके.
70 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने करीब 70 हजार अतिरिक्त जवान जम्मू-कश्मीर भेजे हैं. इनके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के जवानों की भी जम्मू से लेकर बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक तैनाती कर दी गई है.
400 किलोमीटर हाईवे पर विशेष निगरानी
सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू से श्रीनगर तक करीब 400 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और श्रीनगर से यात्रा मार्ग के कई हिस्सों का सुरक्षा ऑडिट किया है. जांच के दौरान ऐसे कई इलाकों की पहचान की गई है, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है.
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घुसपैठ और ड्रोन गतिविधियों वाले इलाके चिन्हित
सुरक्षा बलों के अनुसार जिन इलाकों की पहचान की गई है, वहां पहले पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की घटनाएं होती रही हैं. कुछ क्षेत्रों में हाल के समय में ड्रोन गतिविधियां भी देखी गई हैं. इसके अलावा ऐसे स्थान भी चिन्हित किए गए हैं, जहां पहले पाकिस्तान समर्थित आतंकियों या उनके मददगारों की गतिविधियां सामने आई थीं. इन इलाकों से पहले विस्फोटक सामग्री भी बरामद की जा चुकी है.
संवेदनशील जगहों पर बनाए गए अस्थायी पिकेट
यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए इन संवेदनशील इलाकों में अस्थायी पिकेट बनाए गए हैं. इन पिकेट्स पर सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती कर दी गई है. इनका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना और यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
केंद्र और प्रशासन पूरी तरह सतर्क
इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय पूरी तरह सतर्क हैं. यात्रा के दौरान किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ पूरे यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.






