- जेएनयू ने कर्मचारियों के बच्चों हेतु 5% सुपरन्यूमरेरी कोटा को मंजूरी दी.
- यह कोटा शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए है.
- अतिरिक्त सीटें रहेंगी, सामान्य छात्रों की सीटों पर कोई असर नहीं.
- प्रवेश CUET परीक्षा और मेरिट के आधार पर ही होगा.
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से एक अहम फैसला लिया है. विश्वविद्यालय ने अपने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए 5 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटा मंजूर कर दिया है. इसका मतलब है कि अब इन कर्मचारियों के बच्चे स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) कोर्स में अतिरिक्त सीटों पर दाखिला पा सकेंगे.
यह फैसला 15 अप्रैल को हुई कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक में लिया गया. पहले JNU में कर्मचारियों के बच्चों के लिए 1 प्रतिशत से भी कम सुपरन्यूमरेरी कोटा था, जो सिर्फ कुछ वर्गों तक सीमित था. अब इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है और इसमें शिक्षण स्टाफ को भी शामिल किया गया है.
क्या है सुपरन्यूमरेरी कोटा?
सुपरन्यूमरेरी कोटा का मतलब है अतिरिक्त सीटें. यानी जो सीटें पहले से तय हैं, उन्हें कम नहीं किया जाएगा. इस कोटे के लिए नई सीटें जोड़ी जाएंगी. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इससे सामान्य छात्रों की सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एक अधिकारी ने बताया कि ये सीटें मौजूदा सीटों से अलग होंगी, ताकि सामान्य प्रवेश प्रक्रिया पर कोई दबाव न पड़े.
लंबे समय से उठ रही थी मांग
JNU के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि उनके बच्चों के लिए भी अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह उचित कोटा होना चाहिए. देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कर्मचारियों के बच्चों के लिए 5 से 15 प्रतिशत तक की व्यवस्था पहले से मौजूद है.
इसी को देखते हुए JNU प्रशासन ने एक समिति बनाई, जिसने पूरे मामले की जांच की और 5 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटा देने की सिफारिश की. इस सिफारिश को पहले अकादमिक परिषद (Academic Council) ने मंजूरी दी, फिर कार्यकारी परिषद ने इसे अंतिम रूप दे दिया.
किन्हें मिलेगा फायदा?
JNU के नियमित शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी सेवा के दौरान निधन हो चुके कर्मचारियों के बच्चे भी इस कोटे में शामिल होंगे. यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत माना जा रहा है, जिनके अभिभावक वर्षों से विश्वविद्यालय की सेवा कर रहे हैं.
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प्रवेश प्रक्रिया वही रहेगी
इस कोटे का मतलब यह नहीं है कि बिना परीक्षा के दाखिला मिलेगा. विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि सभी छात्रों को CUET-UG और CUET-PG परीक्षा पास करनी होगी. न्यूनतम योग्यता शर्तें पूरी करनी होंगी. मेरिट के आधार पर ही प्रवेश दिया जाएगा. यानि नियम सबके लिए समान रहेंगे, सिर्फ सीटें अतिरिक्त होंगी.
छात्रों की ओर से विरोध की आवाज
इस फैसले पर छात्र राजनीति में भी हलचल दिखी. जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इस कदम का विरोध किया. उनका कहना है कि प्रोफेसरों और कर्मचारियों के बच्चों के पास पहले से ही अच्छे संसाधन और माहौल होता है, उन्हें अलग कोटे की जरूरत नहीं है. उन्होंने इसे प्रशासन के करीबियों को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया.
प्रशासन का पक्ष
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए लिया गया है. साथ ही, अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पहले से ऐसी व्यवस्था होने के कारण JNU में भी इसे लागू करना उचित समझा गया. अधिकारियों के अनुसार, इससे न तो सामान्य सीटें कम होंगी और न ही प्रवेश प्रक्रिया में कोई ढील दी जाएगी.
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