ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के बीच अब क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान का दौरा पूरा करने के बाद फिर पाकिस्तान लौट सकते हैं और इसके बाद उनका अगला पड़ाव रूस होगा. रॉयटर्स के अनुसार, यह दौरा मौजूदा जंग को लेकर बातचीत और समर्थन जुटाने की कोशिश का हिस्सा है.
अराघची इससे पहले पाकिस्तान के दौरे पर थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की. इन बैठकों में दोनों देशों के रिश्तों और क्षेत्र के बदलते हालात पर चर्चा हुई. हालांकि, इन बातचीतों से कोई बड़ा नतीजा सामने नहीं आया. इसके बावजूद अराघची ने अपने इस दौरे को उपयोगी बताया और कहा कि उन्होंने युद्ध खत्म करने को लेकर ईरान का पक्ष साफ किया है.
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अराघची ने अमेरिका पर साधा निशाना
अराघची ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि अब फैसला वॉशिंगटन को करना है कि वह सच में बातचीत चाहता है या नहीं. ईरान लगातार इस जंग के लिए अमेरिका और इजरायल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराता रहा है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का दौरा रद्द कर दिया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सारे विकल्प हैं और बेकार की बातचीत के लिए लंबी यात्रा करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान चाहे तो खुद संपर्क कर सकता है. ओमान की राजधानी मस्कट में अराघची की मुलाकात वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से होने की उम्मीद है. इस दौरान दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा होगी. ओमान अक्सर ऐसे मामलों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ा
इस बीच हालात और गंभीर तब हो गए जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ गया. यह दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है. खबरों के मुताबिक, हालात बिगड़ने के बाद अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है. उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने तबास की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में अमेरिका को यहां हार का सामना करना पड़ा था. उन्होंने इसे ईरान की ताकत और बाहरी खतरों से सुरक्षा का प्रतीक बताया.
अमेरिका के साथ सीधे बातचीत से बच रहा ईरान
ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत से बच रहा है और पाकिस्तान जैसे देशों के जरिए अपने संदेश पहुंचा रहा है. ईरानी सूत्रों का कहना है कि भले ही युद्धविराम की बात हो रही हो, लेकिन तेहरान अमेरिका की कड़ी शर्तों को मानने के मूड में नहीं है. हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं. एक तरफ कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं तो दूसरी तरफ तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है.
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