- आत्मसंयम, अनुशासन और भगवान विष्णु की पूजा करें।
Mohini Ekadashi 2026 kya khaen kya nahi: हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी अत्यंत पवित्र व्रतों में से एक मानी जाती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन व्रत करने से पापों का नाश होने के साथ मन की शुद्धि और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
साल 2026 में मोहिनी एकादशी की तिथि सोमवार 27 तारीख को पड़ रही है. इस दिन व्रत रखने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि, इस दिन क्या खाएं और क्या नहीं? हिंदू शास्त्रों में व्रत के दौरान गलत खान-पान करने से उपवास का फल कम हो सकता है, इसलिए सही नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.
मोहिनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?
मोहिनी एकादशी के दिन सात्विक और हल्का भोजन करना सही माना जाता है. अगर आप फलाहार व्रत कर रहे हैं, तो फल, दूध और सूखे मेवे का सेवन करना सबसे बेहतर है. इसके अलावा फलों में केला, सेब, पपीता, अनार जैसे फल शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं, जो व्रत के दौरान शरीर में कमजोरी नहीं होने देते हैं.
इसके अलावा आप व्रत में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे कुट्टू और सिंघाड़े का आटा और साबूदाना भी आहार में शामिल कर सकते हैं. इन आटे से बनी पूड़ियां, पकौड़ी या साबूदाना की खिचड़ी खाना सही रहेगा. इसके साथ ही सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं, साधारण नमक व्रत में वर्जित माना जाता है.
दूध, दही, मखाना और मूंगफली भी व्रत में खाना सही मानी जाती है. ये प्रोटीन और ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत हैं. अगर आप पूरे दिन उपवास नहीं कर पा रहे हैं, तो इन चीजों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेते रहें, जिससे शरीर में कमजोरी न आए.
मोहिनी एकादशी तिथि पर क्या नहीं खाना चाहिए?
मोहिनी एकादशी व्रत के मौके पर अनाज और तामसिक भोजन पूरी तरह से वर्जित है. इसके अलावा चावल और बेसन से बने खाद्य पदार्थ का सेवन भी बिल्कुल नहीं करना चाहिए. कई लोग अनजाने में बिस्किट या नमकीन खा लेते हैं, जिसमें चावल या मेदा होता है, जो व्रत तोड़ देता है.
इसके अलावा प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन भी इस दिन पूरी तरह से निषिद्ध हैं. शराब और तंबाकू जैसी चीजों से भी दूर रहना चाहिए. चाय और कॉफी का सेवन भी करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को डिहाईड्रेट करने का काम करते हैं.
व्रत के दौरान ध्यान रखने वाली बातें
मोहिनी एकादशी का व्रत केवल खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और अनुशासन से भी जुड़ा अभ्यास है. इस दिन जल्दी उठकर स्नान और भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है.
यदि आप स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत नहीं रख सकते हैं, तो फलाहार या केवल सात्विक भोजन को ग्रहण करें. किसी भी तरह के अंधविश्वास में पड़कर अपनी सेहत खराब करने से बचें.
मोहिनी एकादशी का व्रत तभी सार्थक होता है, जब आप इसके नियमों का सही से पालन करते हैं. क्या खाना है और क्या नहीं? इस बात को समझना बेहद जरूरी है. अगर आप व्रत के दौरान नियमों का पालन करते हैं, तो न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आ सकते हैं.
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