Ebola Virus: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है. यह संक्रमण बुंडीबुग्यो वायरस के कारण फैल रहा है, जो ईबोला वायरस का एक खतरनाक स्ट्रेन माना जाता है.
यह स्ट्रेन पहले फैल चुके ज़ैरे स्ट्रेन से अलग है. बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-2008 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था. उस समय इस वायरस ने 116 से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया था और करीब 34 से 40 प्रतिशत मरीजों की मौत हुई थी. अब डीआरसी के इटुरी प्रांत में 17वीं बार ईबोला का प्रकोप सामने आया है, लेकिन इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से चिंता और बढ़ गई है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है.
ईबोला के अलग-अलग स्ट्रेन, लेकिन खतरा बरकरार
विशेषज्ञों के मुताबिक ईबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन इंसानों में बड़े स्तर पर संक्रमण मुख्य रूप से ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैलता है. ज़ैरे स्ट्रेन सबसे ज्यादा घातक माना जाता है, जिसमें मृत्यु दर 60 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है. वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम घातक माना जाता है, लेकिन इसमें भी 32 से 40 प्रतिशत तक मौतें दर्ज की गई हैं. कुछ मामलों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, इलाज की उपलब्धता और संक्रमण की गंभीरता के आधार पर मृत्यु दर बदल सकती है.
जंगलों से फैलता है वायरस
रिपोर्ट के अनुसार डीआरसी के घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में यह वायरस प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि चमगादड़ जैसे जंगली जानवर इस वायरस के मुख्य स्रोत हो सकते हैं. यह वायरस बहुत तेजी से फैल सकता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर कई लोगों की जान ले सकता है.
शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे
ईबोला के सभी स्ट्रेन के लक्षण लगभग समान होते हैं. शुरुआत में मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है. कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. बीमारी बढ़ने पर आंखों, मसूड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों से खून बहने लगता है. कई मामलों में शरीर पर चोट जैसे निशान पड़ जाते हैं और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. गंभीर स्थिति में अंग काम करना बंद कर सकते हैं. संक्रमण के लक्षण 2 से 21 दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं.
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ईबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, दस्त और लार के सीधे संपर्क से फैलता है. मृत व्यक्ति के शव को छूने या अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों के दौरान भी संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा रहता है. हालांकि यह वायरस हवा, पानी या कीड़ों के जरिए नहीं फैलता.
इलाज नहीं, सिर्फ देखभाल ही सहारा
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई खास एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इलाज मुख्य रूप से मरीज की देखभाल पर आधारित है. डॉक्टर मरीज के शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं. बुखार और दर्द की दवाएं दी जाती हैं. जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक्स, ऑक्सीजन सपोर्ट और ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मरीज को शुरुआती चरण में अस्पताल में अलग रखकर इलाज शुरू कर दिया जाए तो उसके बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
WHO ने बढ़ाई निगरानी
WHO और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान करने, मरीजों को आइसोलेट करने और सुरक्षित अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं. संगठन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगाने के बजाय स्क्रीनिंग, सीमा निगरानी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले लोगों की 21 दिनों तक निगरानी करने की सलाह दी गई है.
सीमा क्षेत्रों में बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि डीआरसी और युगांडा की सीमा वाले इलाकों में सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं, जिससे जांच और नियंत्रण अभियान प्रभावित हो सकते हैं. किंशासा और कंपाला जैसे बड़े शहरों में भी कुछ मामले सामने आने से चिंता बढ़ गई है. WHO ने सभी पड़ोसी देशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. हालांकि फिलहाल इसे वैश्विक महामारी नहीं माना गया है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है.





