सियोल में भारतीय सैनिकों की याद में बना वॉर मेमोरियल, राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन, जानें क्या ह

सियोल में भारतीय सैनिकों की याद में बना वॉर मेमोरियल, राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन, जानें क्या ह


कोरियाई युद्ध (1950-53) के करीब 75 वर्ष बाद, दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में भारतीय सैनिकों के सम्मान में एक युद्ध-स्मारक का निर्माण किया गया है. गुरुवार को इस वॉर मेमोरियाल के उद्घाटन के मौके पर खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के वेटर्न्स मामलों के मंत्री कुओन ओह-इयुल मौजूद थे.

1950 में दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच तीन साल लंबा युद्ध चला था. युद्ध के दौरान घायल हुए सैनिकों के इलाज के लिए भारतीय सेना ने आगरा से 60 पैरा फील्ड एंबुलेंस को भेजा था. जंग के मैदान में गोलियों के बीच कोरियाई सैनिकों के इलाज के दौरान 05 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे और कुछ सैनिक घायल भी हुए थे. युद्ध के बाद पैरा-फील्ड एंबुलेंस के कमांडिंग ऑफिसर, लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉक्टर) एजी रंगराज को महावीर चक्र से नवाजा गया था, जो जंग के दौरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है.

सियोल दौरे पर हैं राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों (19-21 मई) सियोल की आधिकारिक यात्रा पर हैं. इस दौरान, सियोल के इम्जिंगक पार्क में इस युद्ध-स्मारक का निर्माण किया गया है. खास बात है कि ये वॉर मेमोरियल ठीक उसी जगह बनाया गया है, जहां कोरियाई युद्ध खत्म होने के बाद भारतीय सेना की एक खास टुकड़ी, कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने हिंद-नगर का अस्थायी निर्माण किया था. कोरियाई जंग के खत्म होने के बाद, दोनों देशों के करीब 22 हजार युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय सेना के टॉप कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल थिम्मैया के नेतृत्व में इस फोर्स का गठन किया था. जनरल थिम्मैया ने बाद में लंबे समय (1957-61) के लिए भारतीय सेना की कमान संभाली थी.

भारत ने की फंडिंग  
वॉर-मेमोरियल के उद्घाटन के बाद, राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “सियोल के इम्जिंगक पार्क में भारतीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन समारोह में शामिल होना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात थी. यह समारोह कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था और यह स्मारक युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) द्वारा प्रदर्शित साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को श्रद्धांजलि अर्पित करता है.” इस वॉर मेमोरियल को भारत के रक्षा मंत्रालय की फंडिंग की मदद से तैयार किया गया है. उद्घाटन समारोह में कर्नल रंगराज के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, जो खासतौर इस समारोह में शामिल होने के लिए सियोल पहुंचे थे.

उद्घाटन के बाद राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पैट्रियट और वेटर्न्स मंत्री इयुल ने वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की. राजनाथ सिंह के मुताबिक, “कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता में भारत के योगदान की अमिट विरासत वास्तव में उल्लेखनीय है. दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया गणराज्य विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं.”

स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप
उद्घाटन समारोह में राजनाथ सिंह ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का भी जिक्र किया. बुधवार को राजनाथ सिंह और कोरियाई समकक्ष की मौजूदगी में भारत की एलएंटडी और कोरियाई कंपनी हानवा ने एयर डिफेंस गन और एनर्जी वेपन को लेकर करार किया था. कोरियाई के-9 वज्र तोपों को भी एलएंडटी हानवा कंपनी की मदद से भारत में निर्माण करती है.

भारत के रक्षा मंत्रालय ने वॉर मेमोरियल पर एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “यह आयोजन भारत-दक्षिण कोरिया के साझा इतिहास के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम ज्ञात अध्याय को पुनर्जीवित करने और सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था. कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय कर्मियों का योगदान शांति, मानवीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है.”

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