Kedarnath Dham: उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक बार फिर लैंडस्लाइड (Kedarnath Landslide) की घटना सामने आई है. बीते मंगलवार केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के कारण मुनकटिया क्षेत्र में भूस्खलन हो गया, जिसमें फंसे करीब 10 हजार से अधिक यात्रियों को SDRF की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला.
पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण कई जगह रास्ते प्रभावित हुए, जिससे श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है. लेकिन प्रशासन और राहत दल लगातार मार्ग को सुचारु करने में जुटी और यात्रा फिर से बहाल हुई.
केदारनाथ धाम में लगातार भारी बारिश और कमजोर भौगोलिक संरचना के कारण अक्सर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की घटनाएं होती हैं. ऐसे में जो श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मौसम, सुरक्षा और यात्रा की तैयारी को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी होता है.
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग–गौरीकुंड के बीच हुए भूस्खलन के बाद जिला प्रशासन, SDRF, NDRF और पुलिस टीमों ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। पैदल मार्ग बहाल कर राहत कार्य शुरू कर यात्रा मार्ग पुनः सुचारु किया गया।#UttarakhandPolice pic.twitter.com/4n3MacnGkH
— Uttarakhand Police (@uttarakhandcops) May 20, 2026
केदारनाथ धाम यात्रा का महत्व
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) का श्रद्धालुओं के बीच काफी महत्व है. हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा के लिए आते हैं. चारधाम में केदारनाथ धाम तीसरे स्थान पर आता है.
यह भगवान शिव को समर्पित है. मान्यता है कि, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga) के दर्शन से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
धार्मिक व पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों ने यहीं भगवान शिव की आराधना कर पापों से मुक्ति पाई थी. समुद्र तल से करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम श्रद्धा, तप और आस्था का केंद्र है.
यही कारण है कि हर साल लाखों भक्त कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बता दें कि, इस साल 2026 में 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोले गए थे, जो अगले 6 महीने तक चलेगी.
लैंडस्लाइड के बीच यात्रा कितनी सुरक्षित?
बारिश के मौसम में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, पत्थर गिरना और रास्ते बंद होने जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. इसलिए यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को प्रशासन की एडवाइजरी का ध्यान रखकर यात्रा करनी चाहिए. कई बार मौसम ज्यादा खराब होने पर यात्रा रोक दी जाती है. इसलिए यात्रा से पहले मौसम और रूट अपडेट जरूर चेक करें.
कैसे पहुंचे केदारनाथ
केदारनाथ पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको सड़क मार्ग से सोनप्रयाग पहुंचना होता है. सोनप्रयाग से शटल गाड़ी द्वारा गौरीकुंड जाकर वहां से 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा, खच्चर या पालकी से केदारनाथ धाम पहुंचना होता है. आप फाटा या गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर सेवा भी ले सकते हैं.
ट्रेन यात्रा- अगर आप ट्रेन से केदारनाथ जाना चाहते हैं तो निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून हैं. इन स्टेशनों पर पहुंचने के बाद, आप बस या टैक्सी से केदारनाथ के लिए अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं.
हवाई मार्ग- आप हवाई मार्ग से केदारनाथ की योजना बना रहे हैं तो देहरादून स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डा सबसे निकटतम हवाई अड्डा है. आप हवाई अड्डे से टैक्सी या बस लेकर गौरीकुंड पहुंच सकते हैं.
बस या कार द्वारा – आप यूटीसी पोर्टल का उपयोग करके चार धाम कॉरिडोर के लिए बसों में अपनी सीट बुक करा सकते हैं. हालांकि कई बार बसों का समय और उपलब्धता तारीख व मौसम के अनुसार बदल सकती है, इसलिए टिकट बुक करने से पहले अपनी यात्रा की तारीख और रूट की जानकारी जरूर जांच लें.
केदानथ यात्रा पर के लिए जरूरी सामान
- रेनकोट और वाटरप्रूफ जैकेट
- गर्म कपड़े और ऊनी टोपी
- ट्रैकिंग शूज और अतिरिक्त मोजे
- टॉर्च और पावर बैंक
- जरूरी दवाइयां और फर्स्ट एड किट
- पहचान पत्र और यात्रा रजिस्ट्रेशन कॉपी
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