सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 और 27 मई 2026 को हुई बैठकों में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है. इन नामों में अलग-अलग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट की एक वरिष्ठ वकील शामिल हैं. अब सरकार की मंजूरी के बाद इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू का नाम सुप्रीम कोर्ट के लिए सुझाया है. इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेव और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली के नाम भी भेजे गए हैं.
इन चार जजों के अलावा सुप्रीम Court की वरिष्ठ वकील वी मोहना को भी सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई है. अगर सरकार इन नामों को मंजूरी देती है, तो ये सभी सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पद संभालेंगे. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश की न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ा सबसे अहम पैनल माना जाता है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज शामिल होते हैं, जो अलग-अलग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों पर फैसला लेते हैं.
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कॉलेजियम सिस्टम क्या होता है?
भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के जरिए की जाती है. यह व्यवस्था सीधे संविधान में नहीं लिखी गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों के बाद यह प्रक्रिया लागू हुई. इसी सिस्टम के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर किया जाता है. कॉलेजियम सिस्टम में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज मिलकर फैसला लेते हैं कि किसे जज बनाया जाए. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं. फिलहाल भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई हैं. सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्ति की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले हाई कोर्ट के वरिष्ठ जजों या अनुभवी वकीलों के नाम पर विचार किया जाता है. संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठ जज भी कुछ नाम सुझाते हैं.






