माहरंग बलोच को उम्रकैद: क्या असहमति की आवाज दबाने का नया हथियार बन गया है पाकिस्तान का कानून?

माहरंग बलोच को उम्रकैद: क्या असहमति की आवाज दबाने का नया हथियार बन गया है पाकिस्तान का कानून?


पाकिस्तान एक बार फिर अपने न्यायिक तंत्र और मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के केंद्र में आ गया है. बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. माहरंग बलोच और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर दुनिया भर से सवाल उठ रहे हैं.

नीदरलैंड्स स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (IHRF) ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘न्याय का घोर उपहास’ और ‘कानून के शासन पर सीधा हमला’ बताया है.

डॉ. माहरंग बलोच लंबे समय से बलूचिस्तान में कथित जबरन गायब किए गए लोगों, फर्जी मुठभेड़ों और राज्य दमन के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं. IHRF का कहना है कि उनका अपराध केवल इतना है कि उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने की कोशिश की.

संगठन के बयान में कहा गया है कि यह मुकदमा गंभीर कानूनी अनियमितताओं से भरा हुआ था. आरोप है कि सुनवाई जेल परिसर में एक तरह की ‘गुप्त अदालत’ में हुई, जहां आरोपियों को गवाहों से प्रभावी जिरह करने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया. IHRF ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को निष्पक्ष न्यायिक सुनवाई नहीं कहा जा सकता.

सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान के उस न्यायिक ढांचे पर उठ रहा है, जिस पर वर्षों से राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल धीरे-धीरे आतंकवाद से लड़ने के बजाय असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है.

IHRF ने साफ शब्दों में कहा कि यह फैसला ‘न्याय नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल’ है. संगठन ने चेतावनी दी कि शांतिपूर्ण सामाजिक कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद संबंधी कानून लगाना पाकिस्तान में नागरिक स्वतंत्रताओं पर बढ़ते दबाव का संकेत है.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पहले भी बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चिंता जताते रहे हैं. बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप रहा है कि क्षेत्र में जबरन गुमशुदगी, हिरासत और दमन की घटनाओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती. पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है, लेकिन हर नए मामले के साथ उसकी सफाई पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं.

माहरंग बलोच को उम्रकैद

पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत (ATC) के 10 पन्नों के फैसले में डॉ. माहरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाह को एक FC जवान की मौत से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया. अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस आरोप को स्वीकार किया कि माहरंग बलोच के भाषण के बाद भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हमला किया. हालांकि मुकदमे को लेकर विवाद भी गहरा गया है. दोनों आरोपियों ने वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई का बहिष्कार किया और सरकारी वकील लेने से इनकार कर दिया. बचाव पक्ष ने प्रमुख गवाह मेजर वलीद के अदालत में पेश न होने पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने इसे मामले के मूल तथ्यों को प्रभावित न करने वाला मुद्दा माना और घटना को विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आतंकवाद की श्रेणी में रखा.

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