Punjab Farmers Protest: भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर पंजाब में किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है. किसान संगठनों का कहना है कि अगर यह डील होती है तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय कृषि क्षेत्र, डेयरी कारोबार, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इसी मुद्दे को लेकर किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर पंजाब के कई जिलों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जहां किसानों ने पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले भी फूंके.
पंजाब के 21 जिलों में करीब 28 स्थान पर हुए इन प्रदर्शनों में किसानों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित भारत-अमेरिकी अमेरिका ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों से चर्चा किए बिना ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर करोड़ों किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है.
किसान क्यों कर रहे हैं भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध?
किसान संगठनों का कहना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए भारतीय कृषि बाजार विदेशी उत्पादों के लिए ज्यादा खुल सकता है. उनका दावा है कि अमेरिका सहित अन्य देशों से कृषि उत्पाद, दालें, फल, सब्जियां और कई खाद्य वस्तुएं बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में पहुंच सकती है. इससे घरेलू किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने में मुश्किल और बढ़ सकती है. किसान नेताओं का तर्क है कि अमेरिकी किसान बड़े पैमाने पर सरकारी सब्सिडी प्राप्त करते हैं और उनके पास आधुनिक तकनीक मौजूद है. इसके मुकाबले भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, ऐसे में भारतीय किसानों के लिए विदेशी प्रोडक्ट से कंपटीशन करना बहुत कठिन हो जाएगा.
पंजाब के किसानों को किस बात का डर?
किसान संगठनों का कहना है कि पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में किसान पहले से ही बढ़ती लागत, कर्ज और फसलों के कम दाम जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. उनका आरोप है कि विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ता है, तो किसानों की आय पर ज्यादा दबाव पड़ेगा और कृषि अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है. प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि भारतीय किसानों को अभी भी अपनी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है. ऐसे में विदेशी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से हालात और मुश्किल भरे हो सकते हैं. उनका कहना है कि इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी क्षेत्र, छोटे व्यापारी और कृषि आधारित रोजगार पर भी पड़ेगा.
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कृषि कानून जैसी स्थिति दोहराने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह वही गलती दोहरा रहे हैं, जो तीन कृषि कानून के समय हुई थी. उनका कहना है कि उस समय भी किसानों और संबंधित पक्षों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई थी. अब भी कृषि, डेयरी और छोटे व्यापार से जुड़े लोगों से बातचीत किए बिना बड़े फैसले लिए जा रहे हैं. किसान नेताओं ने मांग की कि अगर सरकार को लगता है कि यह समझौता किसानों के हित में है, तो वह देशभर के किसान संगठनों के साथ खुली बैठक आयोजित करें. उनका कहना है कि इस चर्चा को सार्वजनिक किया जाए, ताकि लोग खुद तय कर सके कि यह समझौता किसके हित में है.
सिर्फ व्यापार समझौता ही नहीं दूसरे मांगे भी उठी
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केवल भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध ही नहीं किया, बल्कि बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के फैसले का भी विरोध जताया है. किसान संगठनों का कहना है कि यह सभी फैसले कृषि क्षेत्र पर एक्स्ट्रा बोझ डाल सकते हैं.
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