Muharram 2026: अजमेर में मोहर्रम पर दिखेगी आस्था और शौर्य की झलक, 600 साल पुरानी पारंपरिक ‘हाएद

Muharram 2026: अजमेर में मोहर्रम पर दिखेगी आस्था और शौर्य की झलक, 600 साल पुरानी पारंपरिक ‘हाएद


Muharram 2026: मोहर्रम के पवित्र और गमगीन अवसर पर करबला के शहीदों की याद में खेली जाने वाली ऐतिहासिक और पारंपरिक ‘हाएदोस’ के लिए ख्वाजा की नगरी पूरी तरह तैयार है. मोहर्रम की नौ और दस तारीख को होने वाले इस पारंपरिक आयोजन को लेकर अकीदतमंदों में खासा उत्साह है.

पंचायत अंजुमन के सह-सचिव एडवोकेट शाहिद ने बताया कि यह गौरवशाली परंपरा लगभग 600 से 700 वर्ष पुरानी है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी अपने पूरे वकार के साथ निभाई जा रही है.

​आज ‘छोटा हाएदोस’, जामा अल्तमश मस्जिद से उठेगा डोला शरीफ

​कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए एडवोकेट शाहिद ने बताया कि आज चाँद की 9 तारीख को धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस आयोजन की शुरुआत होगी.

  • डोले शरीफ का कार्यक्रम: ज़ोहर की नमाज़ (दोपहर) के बाद ऐतिहासिक मस्जिद जामा अल्तमश से डोले शरीफ का कार्यक्रम पूरी अक़ीदत के साथ शुरू होगा.
  • ​छोटा हाएदोस: इसके बाद, ईशा की नमाज़ (रात) के बाद ‘छोटा हाएदोस’ खेला जाएगा. इसकी शुरुआत मुख्य केंद्र चौक हताई से होगी. इस दौरान सुरक्षा और परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई तलवारों का इस्तेमाल किया जाएगा.

आशूरा पर ‘बड़ा हाएदोस’, तालाब पर होगा समापन

​मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौम-ए-आशूरा के मौके पर कल जुमे (शुक्रवार) के दिन मुख्य और भव्य ‘बड़ा हाएदोस’ खेला जाएगा. जुमे की नमाज़ के बाद चौक हताई से यह जुलूस और हाएदोस का प्रदर्शन शुरू होगा. यहाँ से खिलाड़ी और अकीदतमंद पारंपरिक अंदाज़ में अखाड़ेबाज़ी करते हुए त्रिपोलिया गेट, बावड़ी और बड़बाव होते हुए मुख्य तालाब (कर्बला) पहुंचेंगे.

तालाब पर डोले शरीफ की सवारी के साथ ही ‘हाएदोस’ के इस ऐतिहासिक खेल का पूरी अक़ीदत और नम आँखों के साथ समापन किया जाएगा.

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Input By : हितेश बालम



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