Nirjala Ekadashi 2027: निर्जला एकादशी 2027 में कब ? अभी से नोट करें डेट

Nirjala Ekadashi 2027: निर्जला एकादशी 2027 में कब ? अभी से नोट करें डेट


Nirjala Ekadashi 2027 Date: निर्जला एकादशी को करवा चौथ से भी ज्यादा कठिन और विशेष फलदायी माना गया है. करवा चौथ में स्त्रियां सुबह से चंद्रोदय का जल ग्रहण नहीं करती है लेकिन ज्येष्ठ की भीषड़ गर्मी में निर्जला एकादशी पर 24 घंटे निर्जल रहकर व्रत किया जाता है.

पुराणों के अनुसार साल की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का व्रत रखने से बाकी सभी एकादशियों के व्रत जितना पुण्य मिल जाता है. तो जो लोग पूरे साल की एकादशी व्रत नहीं रख सकते हैं वे केवल निर्जला एकादशी का व्रत कर के भी शुभ फल पा सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं अगले साल 2027 में निर्जला एकादशी व्रत कब है.

2027 में निर्जला एकादशी कब

अगले साल निर्जला एकादशी व्रत 14 जून 2027 सोमवार को किया जाएगा. से पाण्डव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. एस्ट्रोलॉजर अनीष व्यास के अनुसार इस व्रत के फल से व्यक्ति इस लोक में समस्त सुख पाकर, मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त होता है.

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निर्जला एकादशी तिथि 2027

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 14 जून को देर रात 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 15 जून 2027 को देर रात 2 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी.

इस दिन पूजा के लिए सुबह 8.52 से सुबह 10.37 तक शुभ मुहूर्त है.

व्रत पारण – निर्जला एकादशी का व्रत पारण 15 जून को दोपहर 1.45 से शाम 4.33 के बीच किया जाएगा. पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 8.13 पर है.

निर्जला एकादशी को क्यों कहते भीमसेनी एकादशी

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता कुंती के पुत्र भीमसेन को भोजन अत्यंत प्रिय था और वे अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख पाते थे. इसी कारण उनके लिए नियमित रूप से एकादशी व्रत करना संभव नहीं हो पाता था. दूसरी ओर, उनके सभी भाई और द्रौपदी पूरे वर्ष आने वाली प्रत्येक एकादशी का श्रद्धापूर्वक पालन करते थे. इस बात से भीम मन ही मन चिंतित रहने लगे. समाधान पाने के लिए वे महर्षि व्यास के पास पहुंचे. तब महर्षि व्यास ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया और बताया कि यह व्रत सभी चौबीस एकादशियों के समान पुण्य प्रदान करता है. तभी से निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा.

निर्जला एकादशी व्रत कैसे करें

  • एकादशी से एक दिन पहले दशमी तिथि पर सात्विक भोजन करें और तामसिक भोजन से बचें. रात में खीरा खाएं ताकि अगले दिन एकादशी व्रत में निर्जल व्रत कर सकें. खीरा खाने से शरीर में पानी की मात्रा कम नहीं होती.
  • निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें.
  • परंपरा के अनुसार इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है. हालांकि, अपनी आयु और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का पालन करें.
  • दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और निर्जला एकादशी व्रत कथा सुनें.
  • जरूरतमंद लोगों को जल, फल, वस्त्र, पंखा, छाता या अन्न का दान करना शुभ माना जाता है.
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर व्रत का पारण करें. पारण के समय पहले भगवान को भोग लगाएं, फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें.

निर्जला एकादशी भोग

निर्जला एकादशी पर विष्णु जी को तुलसी, पंजीरी, केला, पीले रंग की मिठाई का भोग लगाया जाता है. मान्यता है इससे वह प्रसन्न होते हैं.

निर्जला एकादशी दान

  • चावल
  • सत्तू
  • अन्न
  • फल
  • छाता
  • जल
  • आसन
  • शय्या
  • गौ दान
  • कमण्लु

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