SIR का डर और दस्तावेजों में गलतियों का दुखद अंत, हैदराबाद में शख्स ने 1.5 लाख खर्च करने के बाद

SIR का डर और दस्तावेजों में गलतियों का दुखद अंत, हैदराबाद में शख्स ने 1.5 लाख खर्च करने के बाद


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  • पुलिस ने घटना की जांच शुरू की, एजेंटों की भूमिका संदिग्ध।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बोराबंडा इलाके के भरत नगर में शनिवार (27 जून, 2026) की देर रात अपने घर पर एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. मृतक की पहचान शेख मुजीबह मेडचल के रूप में हुई है.

घटना को लेकर परिवारवालों का कहना है कि उन्होंने यह कदम अपने पहचान के दस्तावेजों में गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर बढ़ते डर और तनाव के कारण उठाया है.

परिजनों ने बताया कि मुजीब अपने पासपोर्ट, आधार कार्ड और बच्चों के आधिकारिक दस्तावेजों में नामों की स्पेलिंग और जानकारी में अंतर के कारण भारी मानसिक तनाव में थे. उन्हें डर था कि इन प्रशासनिक गलतियों के कारण SIR प्रक्रिया के दौरान गंभीर मुश्किलें आ सकती हैं, जिससे उनकी वोटर स्टेटस और नागरिकता खतरे में पड़ सकती है.

अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता में थे मुजीब

इन समस्याओं को ठीक करने के लिए मुजीब ने स्थानीय एजेंटों से संपर्क किया और लगभग 1.5 लाख रुपये भी खर्च किए, जिसमें से करीब 40,000 सिर्फ इनकम और कास्ट सर्टिफिकेट बनवाने में लगे थे. इतना पैसा खर्च करने के बाद भी गड़बड़ियां ठीक नहीं हुईं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई.

इसके अलावा, मुजीब अपने दो दिव्यांग बच्चों के भविष्य की सुरक्षा और भलाई को लेकर भी बहुत चिंतित थे, जिससे उनका भावनात्मक बोझ और बढ़ गया. हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि मौत से पहले मुजीब कितने समय से इन दस्तावेजों को ठीक करवाने की कोशिश कर रहे थे. 

पुलिस ने मामले में हर ऐंगल से शुरू की जांच

स्थानीय पुलिस ने घटना की पूरी जांच शुरू कर दी है, ताकि सही तथ्यों और घटनाओं के क्रम का पता लगाया जा सके. अधिकारी अभी परिवार के उन आरोपों की जांच कर रहे हैं, जिनमें अज्ञात एजेंटों के साथ पैसों के लेन-देन और दस्तावेजों में गड़बड़ियों की बात कही गई है. अभी यह पता नहीं चला है कि मुजीब ने अपनी जान देने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया, इसकी पुष्टि के लिए आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

पुलिस ने यह भी पुष्टि नहीं की है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसलिए आत्महत्या के असली कारण की जांच चल रही है. जांचकर्ता इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या एजेंटों ने मुजीब के साथ धोखाधड़ी की थी या देरी की वजह सिर्फ सरकारी प्रक्रिया थी.

फिलहाल, SIR प्रक्रिया के कारण फैली ऐसी व्यापक घबराहट के बारे में परिवार के दावों पर चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. जांच का मकसद मुजीब और इन एजेंटों के बीच हुई बातचीत का सही समय-क्रम और उन घटनाओं के क्रम का पता लगाना है, जिनकी वजह से यह बेहद दुखद घटना हुई. 

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