जिस वक्त US मनाएगा खुशी, खामनेई का जनाजा निकाल मातम में डूबेगा ईरान, 4 जुलाई पर दुनिया की नजर

जिस वक्त US मनाएगा खुशी, खामनेई का जनाजा निकाल मातम में डूबेगा ईरान, 4 जुलाई पर दुनिया की नजर


मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सहमति तो बन गई है, लेकिन जुलाई 2026 का महीना राजनीति के लिहाज से दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है. ईरान के कई शहरों में 4 से 9 जुलाई तक दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम होने वाला है. ईरान ने अपने पूर्व नेता को आखिरी सलामी देने के लिए उस दिन को चुना जब अमेरिका 4 जुलाई को अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ बड़े जोर-शोर से बना रहा होगा. इन दोनों घटनाक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर रहने वाली है.

खामनेई का जनाजा निकाल मातम में डूबेगा ईरान

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को दफनाने का कार्यक्रम 4 से लेकर 9 जुलाई तक होगा. आधिकारिक बयान के मुताबिक, खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के लिए समारोह तेहरान, कोम और मशहद में होंगे. उनका पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई, 2026 को तेहरान मोसल्ला में रखा जाएगा. एक समारोह 7 जुलाई, 2026 को कोम में होगा. आखिरकार, अयातुल्ला अली को 9 जुलाई, 2026 को मशहद में आठवें शिया इमाम की दरगाह में दफनाया जाएगा. इसके बाद ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर में समारोह आयोजित किए जाएंगे.

खामनेई के जनाजे के दिन यूएस क्यों मनाएगा खुशी

दूसरी तरफ 4 जुलाई का दिन अमेरिका की आजादी को होगा, जब पूरा यूएस इसे सेलीब्रेट कर रहा होगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि वह 4 जुलाई 2026 को नेशनल हॉल में एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद यह पद संभाला था. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में खामेनेई और उनके परिवार के कुछ लोगों की मौत हो गई थी. तब से अमेरिका ने ईरान पर लगातार एक के बाद एक कई हमले किए. ऐसे सुरक्षा चिंताओं और अपेक्षित भारी भीड़ के लिए तैयारियों के अभाव में खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी हुई थी.

अमेरिका को ईरान ने दिया सख्त संदेश 

ईरानी छात्रों ने नवंबर 1979 को जब अमेरिकी दूतावास पर धावा बोलकर 66 यूएस नागरिकों को बंधक बनाया तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह संकट 444 दिनों तक खिंच जाएगा. तत्कालीन यूएस राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने इन बंधकों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. यहां तक कि अप्रैल 1980 में उन्होंने एक सीक्रेट मिलिट्री रेस्क्यू ऑपरेशन भी प्लान किया, लेकिन ईरानी रेगिस्तान में अमेरिकी हेलिकॉप्टर क्रैश होने से 5 यूएस सैनिकों की मौत हो गई और यह मिशन बुरी तरह नाकाम रहा.

इस नाकामी ने अमेरिकी जनता के बीच कार्टर की साख को मटियामेट कर दिया. नतीजा ये हुआ कि वे दोबारा राष्ट्रपति का चुनाव हार गए और रोनाल्ड रीगन की जीत का रास्ता साफ हो गया. ईरान ने कार्टर को आखिरी सियासी जख्म देने के लिए उनकी विदाई का ही दिन चुना. 20 जनवरी 1981 को जैसे ही कार्टर व्हाइट हाउस से बाहर कदम रख रहे थे, ठीक उसी वक्त ईरान ने बंधकों को रिहा किया ताकि कार्टर अपनी पूरी प्रेसीडेंसी के दौरान झेली गई इस सबसे बड़ी कसक की जीत का श्रेय न ले सकें.

टारगेट हासिल नहीं कर पाए ट्रंप

ईरान और अमेरिका के बीच चले मौजूदा जंग में ट्रंप वो सब नहीं पा सके जो उन्होंने युद्ध के दौरान या पहले कहा था. ईरान इसमें कुछ हद तक कमजोर तो हुआ, लेकिन मिडिल ईस्ट में उसने अमेरिका ठिकानों पर हमला कर अपने तेवर साफ कर दिए. ईरान में न तो सत्ता परिवर्तन हो पाया, न ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट छोड़ी, जिसे लेकर जंग से पहले कई दौर की बैठक भी हुई थी. दूसरी तरफ ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कर बंद कर दिया, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई में रुकावट आ गई.

ईरान के पूर्व सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत के लगभग 130 दिनों के बाद 4 जुलाई को दफनाया जाएगा. एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा खामेनेई के जनाजे और दफनाने की रस्मों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया था.

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