मैं भी एक इंसान, मेरे भी दुख-तकलीफ…बिना ट्रायल तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने सुनाई आपबीती

मैं भी एक इंसान, मेरे भी दुख-तकलीफ…बिना ट्रायल तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने सुनाई आपबीती


6 साल से तिहाड़ जेल में बंद स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद ने एक इंटरव्यू दिया. इसमें उन्होंने देश की हालिया राजनीति पर अपनी बात रखी. साथ ही कहा कि इंसानियत एक विशेषाधिकार है. लेकिन यह अधिकार मुझ जैसे लोगों को नहीं मिलता.

खालिद के निशाने पर मौजूदा बीजेपी सरकार रही. इसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर निशाना साधा और उनपर नफरत और फेक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने इस दौरान अपनी हेल्थ को लेकर कहा कि मुझसे इंसानियत और मेरे मानसिक संतुलन को छीन लिया गया है.

जेल से खालिद का पहला इंटरव्यू, बोले- मेरी पहचान को खत्म कर दिया 

खालिद ने द गार्जियन को दिए जेल से अपने पहले इंटरव्यू में यह सारी बातें कहीं हैं. उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के जरिए कहा कि जिन लोगों के साथ आप खाना खाते हैं, वो भी आपके पीठ पीछे आतंकवादी कहते हैं. एक इंसान के तौर पर उनकी पहचान को खत्म कर दिया गया है.  

खालिद ने कहा कि आपको सकारात्मक या नकारात्मक इमेज में सिमट दिया जाता है, तो मेंटल हेल्थ को स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है. दरअसल, हाल ही में दिल्ली की अदालत ने खालिद की जमानत को लेकर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. कड़कड़डूमा कोर्ट में उनकी दलीलों के लिए 4 जुलाई की तारीख नियत की है.

खालिद बोले- मैं भी एक इंसान हूं, मेरे भी दुख-तकलीफ हैं

खालिद ने कहा कि आपके हित में सोचने वाले लोग भी आपकी छवी को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं, लेकिन वह भूल जाते हैं, कि मैं भी एक इंसान हूं. मेरे भी दुख और तकलीफ हैं. मेरे भी डर हैं. खामिया हैं. बकायदा उन्होंने कहा कि जेल में बंद रहने से उनको मानसिक प्रताड़ना तो झेलना पड़ी, बल्कि शरीर पर भी बुरा असर हुआ है. 

भारत का समाज से सच्चाई से परे जीने का आदी हो गया

खालिद ने कहा कि भारत का समाज एक पोस्ट ट्रुथ यानी सच्चाई से परे बनने की दिशा की ओर बढ़ चुका है. साथ ही सिविल सोसाइटी की चुप्पी पर भी खालिद ने सवाल उठाए हैं. खालिद ने स्वीकारा है कि वह बहुत निराश और अकेलापन महसूस करते हैं. 

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2020 में UAPA के तहत किया था खालिद को अरेस्ट

बता दें, खालिद को सितंबर 2020 में यूएपीए के तहत अरेस्ट किया था. उनपर दिल्ली दंगे में मुख्य साजिशकर्ता और हिंसक रूप से सत्ता बदलने की साजिश का आरोप था. हालांकि, वह इस तरह के किसी भी आरोप से इनकार करते हैं. इधर, बीजेपी का कहना है कि भारत का ज्यूडिशियल सिस्टम स्वतंत्र है. इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.

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