Sandalwood Farming: खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच अब कई किसान ऐसी फसलों की ओर भी रूख कर रहे हैं ,जो लंबे समय में बड़ा मुनाफा दे सके. इन फसलों में एक फसल चंदन भी है, जिसे दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में गिना जाता है. इसकी खास बात यह है कि किसान इसे पूरे खेत में लगाने की बजाय खेतों की मेड़ों पर भी लगा सकते हैं और बीच की जमीन पर पहले की तरह दूसरी फसल उगा सकते हैं. इस तरह खेती भी चलती रहती है और आगे के लिए चंदन के पेड़ एक तरह का फिक्स डिपाजिट बन जाते हैं.
कहां-कहां की जाती हैं चंदन की खेती?
चंदन की खेती देश के ज्यादातर इलाकों में की जा सकती है. रेतीले और ज्यादा बर्फीले क्षेत्र को छोड़कर कई क्षेत्र में इसके अच्छे रिजल्ट देखने को मिलते हैं. सफेद चंदन की खेती उत्तर भारत में ज्यादा की जाती है, जबकि लाल चंदन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बेहतर तरीके के ग्रो करता है. इसकी खेती के लिए अच्छी पानी की व्यवस्था वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. लाल मिट्टी, चट्टानी, पथरीली और चुनेदार मिट्टी में भी इसकी अच्छी ग्रोथ होती है, जबकि जल भराव वाली जमीन इसके लिए उपयुक्त नहीं होती है.
पूरे खेत में नहीं किनारे पर भी लगा सकते हैं पौधे
चंदन की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे खेत के किनारों पर भी लगाया जा सकता है. जिससे खेत के बीच की जमीन पर गेहूं, सरसों, दलहन या धान जैसी दूसरी फसल उगाई जा सकती है. इस मॉडल से किसानों की नियमित आय भी बनी रहती है और लंबे समय बाद चंदन की लकड़ी से अलग कमाई होती है.
चंदन का पौधा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
चंदन के पौधे किसी भी मौसम में लगाया जा सकते हैं, लेकिन दो से ढाई साल पुराने पौधे लगाने को ज्यादा बेहतर माना जाता है. खेत तैयार करने के लिए गहरी जुताई के बाद गड्ढे बनाकर पौधा रोपण किया जाता है. शुरुआती समय में पौधे के आसपास साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी होता है, ताकि खरपतवार उसकी ग्रोथ में दिक्कत ना करें. चंदन के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती है, इसलिए इन्हें ऐसी जगह नहीं लगाना चाहिए, जहां पानी भरा हो. बारिश के मौसम में जड़ों के पास जलभराव भी नहीं होना चाहिए, इसके लिए मेड़ को थोड़ा ऊंचा रखने की सलाह दी जाती है. वहीं शुरुआत में जरूरत के अनुसार इसमें सिंचाई की जाती है, लेकिन मिट्टी में लगातार पानी रहना पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
पौधे की सुरक्षा और कीड़ों से बचाव
शुरुआती कई सालों तक चंदन के पेड़ में खुशबू नहीं होती है, इसलिए उसे उस समय भारी सुरक्षा की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन जैसे लकड़ी बढ़ने लगती है और उसमें खुशबू आने लगती है वैसे उसकी सुरक्षा जरूरी हो जाती है. ऐसे में खेत की घेराबंदी कर पशुओं से पौधों को बचाया जा सकता है. इसके अलावा सैंडल स्पाइक रोग सबसे गंभीर माना जाता है. इस रोग से पेड़ की पत्तियां सिकुड़ने लगती है और उसकी ग्रोथ में दिक्कत हो सकती है. एक्सपर्ट इसके बचाव के लिए चंदन के पौधे के पास नीम लगाने की सलाह देते हैं, जिससे कई प्रकार के बीमारियों का खतरा कम होता है.
कब तैयार होता है चंदन का पेड़?
चंदन की ग्रोथ धीरे होती है. पौधे लगाने के कुछ सालों बाद इनमें सुगंधित लकड़ी बनने लगती है, लेकिन व्यावसायिक रूप से कटाई के लिए आमतौर पर 12 से 15 साल का समय माना जाता है. पेड़ की जड़ों में सुगंधित लकड़ी होती है, इसलिए कटाई के समय इसे जड़ सहित निकाला जाता है. वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक एकड़ में चंदन के सैकड़ों पौधे लगाए जा सकते हैं और सही देखभाल होने पर इससे करोड़ों रुपये तक की आय हो सकती है.
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