अगर आपके खेत की मिट्टी का pH 6.0 से 7.0 के बीच है. तो फिर कोई दिक्कत नहीं है. यह न्यूट्रल रेंज मानी जाती है और इसमें ज्यादातर अनाज और सब्जियां आसानी से उग जाते हैं. इस रेंज में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स पौधों को बड़ी आसानी से मिल जाते हैं. जिससे फसल हमेशा लहलहाती रहती है.

गेहूं की फसल की बात करें तो इसके लिए 6.0 से 7.5 तक का pH सबसे मुफीद माना जाता है. सही pH मिलने पर गेहूं के दाने चमकदार और वजनदार बनते हैं. अगर मिट्टी ज्यादा तेजाबी या क्षारीय हो जाए तो पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और बालियां छोटी रह जाती हैं. इसलिए बोआई से पहले मिट्टी का pH टेस्ट कराना एक स्मार्ट फैसला होता है.

धान यानी चावल की फसल थोड़ी अलग मिजाज की होती है. यह 5.5 से 6.5 की हल्की एसिडिक मिट्टी में भी बहुत शानदार पैदावार देती है. खेत में पानी भरा रहने की वजह से मिट्टी का pH अपने आप थोड़ा कम हो जाता है. अगर pH 7.5 से ऊपर चला जाए. तो धान के पौधों में जस्ता यानी जिंक की भारी कमी देखने को मिलने लगती है.

मक्के की खेती के लिए 5.8 से 7.0 तक का pH एकदम परफेक्ट माना गया है. मक्के के पौधों को तेजी से बढ़ने के लिए बहुत ज्यादा न्यूट्रिएंट्स की जरूरत होती है. जो इसी रेंज में आसानी से अब्जॉर्ब होते हैं. अगर मिट्टी ज्यादा साल्टी या एसिडिक होगी तो मक्के के पत्ते पीले पड़ने लगेंगे और भुट्टे का साइज भी काफी छोटा रह जाएगा.

दालों की बात करें जैसे अरहर, मूंग, चना या मटर, तो इनके लिए 6.5 से 7.5 का pH बहुत बढ़िया रहता है. दाल वाले पौधों की जड़ों में जो गांठे होती हैं वह हवा से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी को उपजाऊ बनाती हैं. यह नेचुरल प्रोसेस तभी अच्छे से काम करता है जब मिट्टी का pH न्यूट्रल या हल्का सा एल्कलाइन बना रहे.

सब्जियों में आलू के लिए थोड़ी एसिडिक मिट्टी ज्यादा सही रहती है. आलू की खेती के लिए 5.0 से 6.5 का pH सबसे बेस्ट रहता है. कम pH रहने से आलू की स्किन पर पपड़ी वाली बीमारी लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है. इसलिए आलू के खेत में चूना डालने से हमेशा बचना चाहिए.

टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों के लिए 6.0 से 7.0 का pH एकदम सही रहता है. इस pH लेवल पर पौधे बीमारियों से बचे रहते हैं और फल भी भरपूर मात्रा में आते हैं. अगर आपकी मिट्टी का pH 7.5 से ऊपर चला जाता है. तो पौधों में कैल्शियम और आयरन की कमी होने लगती है जिससे फूल और फल झड़ने लगते हैं.

सरसों और गन्ना जैसी नगदी फसलों के लिए 6.0 से 7.5 का pH सबसे सही माना जाता है. अगर आपकी मिट्टी का pH 5.5 से नीचे गिर गया है तो खेत में चूना डालकर उसे सही करें. वहीं अगर pH 8.5 से ऊपर चला गया है तो जिप्सम या हरी खाद का इस्तेमाल करके मिट्टी की सेहत सुधारें तभी खेती में मुनाफा मिलेगा.
Published at : 07 Aug 2026 12:53 PM (IST)






