Aaj Ka Panchang: 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को दुर्गाष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दिन है. अष्टमी सुबह 10:51 बजे तक रहेगी, फिर नवमी शुरू होगी. नई दिल्ली में संधि पूजा का समय सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक है. अष्टमी पर कन्या पूजन करने वाले परिवार सुबह का कार्यक्रम इसी तिथि को ध्यान में रखकर तय करें.
आज पूजा के तीन अलग चरण हैं, अष्टमी की आराधना, दोनों तिथियों के मिलन पर संधि पूजा और फिर नवमी का पूजन. संधि पूजा के 48 मिनट को हर पूजा का साझा मुहूर्त न समझें. वहीं, दोपहर बाद बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह की अष्टमी पूजा का विकल्प नहीं है.
आज कन्या पूजन कब करें?
जिन परिवारों में अष्टमी तिथि में कन्या पूजन की परंपरा है, वे सुबह 10:51 बजे तक का ध्यान रखें. यह अष्टमी समाप्त होने का समय है, अलग से निकाला गया कन्या पूजन मुहूर्त नहीं.
अगर परिवार में नवमी पर कन्या पूजन होता है तो सुबह 10:51 बजे के बाद नवमी तिथि रहेगी. इसलिए इसके बाद कन्या पूजन होने को केवल तिथि के आधार पर गलत नहीं कह सकते. अष्टमी और नवमी की पारिवारिक परंपराएं अलग हैं.
आज महानवमी भी मनाई जा रही है. Hindu Panchang के पर्व-निर्णय में अष्टमी के दिन शाम से पहले नवमी शुरू होने पर दोनों की पूजा एक दिन हो सकती है. हालांकि नवमी तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे तक चलेगी.
संधि पूजा के 48 मिनट क्यों अलग हैं?
संधि पूजा सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक होगी. इसमें अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट शामिल हैं. ठीक बीच में, 10:51 बजे, तिथि बदलेगी.
यह पूजा अष्टमी और नवमी के मिलन से जुड़ी है. इसलिए इसे शाम की संध्या पूजा समझकर सूर्यास्त तक न टालें. इसका समय जिस पहर पड़े, अनुष्ठान उसी निर्धारित अवधि में होता है. धार्मिक मान्यता में यह देवी चामुंडा की आराधना का अवसर है.
आज का पंचांग एक नजर में
वार- सोमवार
पूर्णिमांत और अमांत मास- आश्विन
पक्ष- शुक्ल पक्ष
तिथि- अष्टमी सुबह 10:51 तक, फिर नवमी
नक्षत्र- उत्तराषाढ़ा दोपहर 3:38 तक, फिर श्रवण
योग- धृति, 20 अक्टूबर रात 12:35 तक, फिर शूल
करण- बव सुबह 10:51 तक, फिर बालव रात 11:54 तक
सूर्य राशि- तुला
चंद्र राशि- मकर
सूर्योदय-सूर्यास्त: सुबह 6:24-शाम 5:48
चंद्रोदय: दोपहर 1:49
चंद्रास्त: 20 अक्टूबर रात 12:24
चंद्रमा आज राशि नहीं बदलेगा. रात के बाद लिखे चंद्रास्त और योग समाप्ति के समय 20 अक्टूबर की शुरुआती रात के हैं.
राहुकाल और यमगण्ड में पूजा का समय पड़ रहा है?
राहुकाल- सुबह 7:49-9:15
यमगण्ड- सुबह 10:40-दोपहर 12:06
गुलिक- काल दोपहर 1:31-2:57
दुष्टमुहूर्त- दोपहर 12:29-1:14 और 2:46-3:31
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43-दोपहर 12:29
संधि पूजा के कुछ हिस्से में यमगण्ड पड़ेगा. लेकिन संधि पूजा का समय तिथि के मिलन से तय है. उसे यमगण्ड समाप्त होने तक खिसकाने पर संधि काल ही निकल जाएगा. इसी तरह अभिजीत तक इंतजार करके अष्टमी तिथि में पूजा नहीं हो सकेगी, क्योंकि तब नवमी शुरू हो चुकी होगी.
सर्वार्थ सिद्धि योग कब बनेगा?
सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 3:38 से 20 अक्टूबर सुबह 6:25 बजे तक रहेगा. यह श्रवण नक्षत्र शुरू होने के साथ बनेगा. सुबह के कन्या पूजन या संधि पूजा को इस योग के इंतजार में न टालें.
सुबह अष्टमी की पूजा, निर्धारित समय में संधि पूजा और उसके बाद नवमी के अनुष्ठान. नया मांगलिक काम तय कर रहे हैं तो उसके लिए अलग मुहूर्त देखें.
क्या नवमी शुरू होते ही नवरात्रि व्रत खोल सकते हैं?
पूरे नवरात्रि का व्रत रखने वालों के लिए नवमी शुरू होना अपने आप पारण का समय नहीं है. Hindu Panchang ने इस वर्ष नवरात्रि पारण 20 अक्टूबर, मंगलवार को दिया है. केवल अष्टमी का व्रत और पूरे नवरात्रि का व्रत अलग संकल्प हैं.
आज की 3 जरूरी बातें
– अष्टमी में पूजा करनी है तो सुबह 10:51 बजे की तिथि समाप्ति ध्यान रखें.
– संधि पूजा सुबह 10:27-11:15 बजे है. इसे शाम तक न टालें.
– महानवमी आज है, लेकिन पूरे नवरात्रि व्रत का पारण 20 अक्टूबर को है.
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