महिला आरक्षण-परिसीमन पर चर्चा-समर्थन की मांग, किरेन रिजिजू ने लिखा खरगे को पत्र 

महिला आरक्षण-परिसीमन पर चर्चा-समर्थन की मांग, किरेन रिजिजू ने लिखा खरगे को पत्र 


केंद्रीय राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा. इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा करने और समर्थन की अपील की. पत्र PM मोदी को लिखे पत्र के जवाब में है. 

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा है. इसमें महिला आरक्षण समेत परिसीमन बिल पर चर्चा और समर्थन की बात कही गई है. इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने बिल पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग की थी. 

महत्वपूर्ण बात यह है कि किरेन रिजिजू ने इस बात का साफ तौर पर जिक्र किया है कि सरकार भविष्य में जो भी महत्वपूर्ण बिल लेकर आए, कांग्रेस उसमें सकारात्मक चर्चा में हिस्सा ले.

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और राज्यसभा के विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी को मेरा पत्र, जो प्रधानमंत्री को लिखे गए, उनके पत्र के जवाब में है. 

रिजिजू ने कहा है कि 16 अक्टूबर 2026 को पीएम मोदी को पत्र लिखकर कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन संशोधन विधेयक को संसद में विचार के लिए जाने जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी. इसपर रिजिजू ने कहा है कि सरकार की तरफ से विपक्ष के साथ चर्चा हुई है और पत्राचार भी हुआ है. 

सत्रावसान न करने पर क्या बोले किरेन रिजिजू?

पत्र में केंद्रीय मंत्री ने उस टिप्पणी का जिक्र किया है, जिसमें 13 अगस्त 2026 को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी संसद का सत्रावसान नहीं किया गया है. संविधान में ऐसी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है. जिसके तहत सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए सत्रावसान करना अनिवार्य हो. केवल इस आधार पर कि संसद का सत्रावसान नहीं हुआ है, किसी संवैधानिक अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. 

इसके अलावा समर्थन में पुराने उदाहरण भी दिए गए हैं. उन्होंने कहा है कि अतीत में कई बार संसद लंबे समय तक सत्रावसान के रही है. उनके अनुसार 2009 में लोकसभा 21 और 22 जुलाई को प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठी थी. इसके बाद सदन 17 अक्टूबर को फिर बैठा और 24 अक्टूबर को स्थगित हुआ. अगली बैठक 10 दिसंबर को हुई. 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49-49 दिन और 1963 में 41 दिन के अंतराल का भी उल्लेख किया गया है.

रिजिजू ने कहा है कि सरकार सार्थक चर्चा और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है. वह रचनात्मक सहयोग करें. भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों की प्रक्रिया में बाधा न डालें. 



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