भारत दौरे पर वेस्टइंडीज की टी20 टीम में एक बार वही झलक दिखाई दी, जिसने 2012 और 2016 में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता था. उससे पहले वनडे सीरीज में भी कैरेबियाई टीम पीछे नहीं थी, जहां उसे 1-2 से हार मिली थी. खबर है कि वनडे और टी20 सीरीज से कुल 285 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, लेकिन इनमें से एक भी पैसा वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के पास नहीं जाएगा.
285 करोड़, यह सारा पैसा मेजबान बोर्ड यानी BCCI के पास जाएगा. वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिलेगी. इस विषय पर वेस्टइंडीज के हेड कोच डैरेन सैमी ने सवाल खड़े कर दिए हैं. सैमी का कहना है कि वेस्टइंडीज को आर्थिक सहारे की जरूरत है.
वेस्टइंडीज क्रिकेट को आर्थिक सहारे की जरूरत
कोच डैरेन सैमी ने ICC के 1997 साले रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर सवाल खड़े किए. दरअसल 1997 से पहले का नियम कहता था कि जब भी कोई टीम विदेशी दौरे पर जाती थी, तो उसे कुल कमाई का कुछ हिस्सा मिलता था. मगर 1997 में इस नियम में बदलाव किया गया, जिसके बाद सीरीज से जितना भी रेवेन्यू आएगा वह सब मेजबान बोर्ड के पास जाने लगा.
डैरेन सैमी ने कहा, “हम ऐसी स्थिति में हैं, जहां आर्थिक रूप से किसी को वेस्टइंडीज क्रिकेट का सहारा बनने की जरूरत है. दुनिया की बेहतरीन टीमों में से एक, भारत के खिलाफ इस तरह की सीरीज हमें उस बेहतर स्थिति के करीब ले आती है.”
नए स्पॉन्सर मिलने की उम्मीद
बेशक वेस्टइंडीज ने भारतीय टीम को चुनौती दी है. पहले 2 वनडे मैच हारने के बाद वेस्टइंडीज ने तीसरे मुकाबले में वापसी करते हुए 352 रनों का टारगेट चेज कर डाला था. वनडे सीरीज में भारत 2-1 से जीता था. टी20 सीरीज में वेस्टइंडीज ऐसी स्थिति में थी, जहां से वह सीरीज 3-2 से अपने नाम कर सकती थी, लेकिन आखिरी मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया.
वेस्टइंडीज टीम के पूर्व कप्तान और मौजूद हेड कोच डैरेन सैमी ने कहा, “चीजें व्यवस्थित कर दी गई हैं, दूसरी यह कि कठिन चुनौतियों के बावजूद हम डटे हुए हैं. हमने एक बड़ा कदम बढ़ाया है. उम्मीद है कि भारत के खिलाफ इस सीरीज के बाद स्पॉन्सर और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत बेहतर हो सकेगी.”
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