India @2047 Conclave: सुरजीत सिंह भल्ला बताएंगे आर्थिक संकट से निपटने का फॉर्मूला

India @2047 Conclave: सुरजीत सिंह भल्ला बताएंगे आर्थिक संकट से निपटने का फॉर्मूला


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  • उन्होंने वैश्वीकरण, गरीबी जैसे विषयों पर कई किताबें लिखीं।

India 2047 Conclave: जाने-माने अर्थशास्त्री सुरजीत सिंह भल्ला 3 जून, 2026 को ABP नेटवर्क के ‘India @ 2047 Conclave’ में एक अहम सत्र की अगुवाई करेंगे. इस सत्र में वे आर्थिक चुनौतियों से निपटने और भारत के भविष्य के विकास की दिशा तय करने पर अपने विचार साझा करेंगे. भल्ला दोपहर के सत्र में प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे, जिसका शीर्षक है”आर्थिक संकट: सरकार को क्या करना चाहिए?” इस चर्चा का मुख्य फोकस नीतिगत उपायों, आर्थिक सुधारों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने की रणनीतियों पर रहने की उम्मीद है.

अनुभवी अर्थशास्त्री करेंगे अहम नीतिगत चर्चा की अगुवाई

आर्थिक नीति-निर्माण और वित्तीय बाजारों में एक प्रमुख हस्ती के तौर पर पहचाने जाने वाले सुरजीत भल्ला, वर्तमान में Oxus Investments के चेयरमैन हैं. यह नई दिल्ली स्थित एक शोध और पोर्टफोलियो प्रबंधन फर्म है. 1998 में अपनी स्थापना के बाद से, Oxus भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश का सक्रिय रूप से प्रबंधन कर रही है. यह भारत में पोर्टफोलियो प्रबंधन का लाइसेंस पाने वाली शुरुआती फर्मों में से एक थी.

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भल्ला की शैक्षणिक पृष्ठभूमि दुनिया के कुछ अग्रणी संस्थानों से जुड़ी है. उन्होंने 1969 में Purdue University से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की. ​​इसके बाद, 1972 में उन्होंने Princeton University के Woodrow Wilson School से मास्टर ऑफ पब्लिक अफेयर्स की डिग्री प्राप्त की. बाद में, 1977 में उन्होंने Princeton University से ही अर्थशास्त्र में Ph.D. पूरी की.

वैश्विक संस्थानों में शानदार करियर

अपने करियर के दौरान, भल्ला ने कई प्रतिष्ठित संगठनों के साथ काम किया है, जिनमें Rand Corporation, Brookings Institution और World Bank शामिल हैं. उन्होंने Delhi School of Economics में अध्यापन भी किया है और एक अर्थशास्त्री, रणनीतिकार, ट्रेडर और पोर्टफोलियो प्रबंधक के तौर पर अहम भूमिकाएं निभाई हैं.

उनके पेशेवर सफर में Goldman Sachs, Deutsche Bank, World Bank और Oxus Investments जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ काम करने का अनुभव शामिल है. निजी क्षेत्र से परे, उन्होंने भारत सरकार के साथ सलाहकार की भूमिका निभाते हुए सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में भी व्यापक योगदान दिया है.

भल्ला National Statistical Commission के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके अलावा, वे Reserve Bank of India और भारत सरकार द्वारा गठित ‘पूंजी खाता परिवर्तनीयता’ (Capital Account Convertibility) से जुड़ी अहम समितियों के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने डेरिवेटिव्स, द्वितीयक बाजारों और पोर्टफोलियो प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर बाजार नियामक SEBI के साथ भी मिलकर काम किया है.

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विचारक, लेखक और टिप्पणीकार

आर्थिक चिंतन के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से सम्मानित भल्ला ने वैश्वीकरण, विकास, गरीबी और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर कई किताबें लिखी हैं. उनकी रचनाओं में ‘इमेजिन देयर इज़ नो कंट्री: पॉवर्टी, इनइक्वालिटी, एंड ग्रोथ इन द एरा ऑफ़ ग्लोबलाइज़ेशन’ और ‘सेकंड अमंग इक्वल्स’ शामिल हैं.

अपने अकादमिक और नीतिगत कार्यों के अलावा, उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति, वित्तीय बाज़ारों और क्रिकेट पर सैकड़ों लेख लिखे हैं. वह वैश्विक आर्थिक मंचों में भी नियमित रूप से हिस्सा लेते रहे हैं और उन्होंने सार्वजनिक मामलों तथा समसामयिक मुद्दों पर केंद्रित एक साप्ताहिक टेलीविज़न इंटरव्यू कार्यक्रम की मेज़बानी भी की है. 



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