Narasimha Temples: आंध्र प्रदेश के इस रहस्यमयी जंगल में विराजते हैं भगवान नरसिंह के 9 रूप, जाने

Narasimha Temples: आंध्र प्रदेश के इस रहस्यमयी जंगल में विराजते हैं भगवान नरसिंह के 9 रूप, जाने


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • प्रत्येक मंदिर भगवान नरसिंह के अलग-अलग स्वरूपों को दर्शाता है।

Andhra Pradesh, Narasimha Temple: आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नल्लामाला की पहाड़ियों के बीच एक ऐसा पवित्र स्थान है, जिसकी गूंज सतयुग से चली आ रही है. हम बात कर रहे हैं अहोबिलम की, जिसे भगवान विष्णु के ‘नरसिंह अवतार’ की स्थली माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान ने खंभा फाड़कर अवतार लिया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते हुए हिरण्यकश्यप का वध किया था.

नवा नरसिंह क्षेत्र के ये मंदिर दो भागों— निचला अहोबिलम और ऊपरी अहोबिलम में बंटे हुए हैं.

आइए जानते हैं इन नौ मंदिरों और उनके पीछे की रोचक कहानियों के बारे में:

Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह में तुलसी चालीसा के पाठ से दूर होगी दरिद्रता, जानें पूजन की सही विधि

ज्वाला नरसिंह (Jwala Narasimha)

यह मंदिर ऊपरी अहोबिलम की पहाड़ी पर स्थित है. माना जाता है कि यही वह सटीक स्थान है जहाँ भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया था. भगवान के प्रचंड क्रोध के कारण इस स्थान का नाम ‘ज्वाला’ पड़ा.

अहोबिला नरसिंह (Ahobila Narasimha)

यह इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन और मुख्य मंदिर है. ऊपरी अहोबिलम में स्थित इस मंदिर में भगवान अपने ‘उग्र’ रूप में हैं. कहा जाता है कि वध के पश्चात इसी स्थान पर भगवान ने प्रह्लाद को आशीर्वाद दिया था.

मालोल नरसिंह (Malola Narasimha)

यदि आप भगवान का शांत रूप देखना चाहते हैं, तो मालोल नरसिंह के दर्शन अवश्य करें. ‘मा’ का अर्थ है लक्ष्मी और ‘लोल’ का अर्थ है प्रेमी. यहां भगवान अपनी अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी (अमृतवल्ली) के साथ अत्यंत सौम्य मुद्रा में विराजमान हैं.

क्रोड़ा नरसिंह (Kroda Narasimha)

एक रहस्यमयी गुफा में स्थित इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान नरसिंह के साथ भगवान वराह का स्वरूप भी समाहित है. इसे ‘वराह नरसिंह’ के नाम से भी जाना जाता है.

करंज नरसिंह (Karanja Narasimha)

यह मंदिर एक विशाल ‘करंज’ वृक्ष के नीचे स्थित है. यहां की सबसे अनोखी बात यह है कि भगवान के हाथ में धनुष और बाण हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी.

भार्गव नरसिंह (Bhargava Narasimha)

इस मंदिर का नाम भगवान परशुराम (भार्गव) के नाम पर पड़ा है. मान्यता है कि परशुराम जी ने यहां तपस्या कर भगवान नरसिंह के दर्शन प्राप्त किए थे. यह मंदिर एक शांत झील के तट पर स्थित है.

योगानंद नरसिंह (Yogananda Narasimha)

हिरण्यकश्यप के वध के बाद, जब भगवान का क्रोध शांत हुआ, तब उन्होंने प्रह्लाद को योग की शिक्षा दी. यहां भगवान ध्यान (योग) मुद्रा में विराजमान हैं, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है.

छत्रवट नरसिंह (Chatravata Narasimha)

पीपल के पेड़ (छत्रवट) के नीचे स्थित इस मंदिर का संबंध संगीत और कला से है. कहा जाता है कि यहाँ गंधर्वों ने अपने मधुर गायन से भगवान को प्रसन्न किया था, इसलिए यहाँ भगवान को संगीत प्रेमी के रूप में पूजा जाता है.

पावन नरसिंह (Pavana Narasimha)

गरुड़ नदी के तट पर स्थित यह मंदिर नौ मंदिरों में सबसे कठिन मार्ग वाला माना जाता है. घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भक्तों का विश्वास है कि यहां आने से सभी पापों का नाश हो जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



Source link