Navgrah Dev Guru Brihaspati Katha: एक समय स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नवग्रहों में सबसे सूर्य, फिर चंद्रमा,फिर मंगल और फिर बुध ने अपने गुणों का गुणगान किया, जिसकी कथा हमने आपको बताई थी. यहां पढ़ें- Navgrah Katha 4: नवग्रहों में पढ़ें बुध देव की कथा
देव गुरु बृहस्पति ग्रह की कथा (Guru Brihaspati Katha ki Kahani)
देवताओं का गुरु होने के कारण सभी मुझे मानते हैं. देवगुरु के रूप में इस सभा में मेरा उच्च स्थान है. मैं ही जातक की कुंडली में राजयोग बनाकर देवर्षि का पद दिलाता हूं. मैं पुत्र प्राप्ति तथा संतान सुख का कारक हूं. व्यक्ति के शुभ-अशुभ कर्मों, धर्म, ज्ञान और मानसिक योग्यता का विचार भी मुझसे ही किया जाता है. मैं सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला ग्रह हूं. परिवार, अचल संपत्ति, वाणी की मधुरता और सद्गुणों का दाता भी मैं ही हूं. आध्यात्मिक ज्ञान और श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करना मेरा स्वभाव है.
सतयुग में मैं सत्यवादी हरिश्चंद्र के रूप में प्रसिद्ध था, त्रेतायुग में श्रीराम के स्वरूप में मेरा महत्व झलकता था और द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में भी मेरा ही प्रभाव था. मैं ही विष्णु स्वरूप हूं और तीनों लोकों में पूजनीय हूं. कलियुग में शांति, ज्ञान और सदाचार की रक्षा भी मेरे प्रभाव से ही बनी हुई है.
बृहस्पतिवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति उच्च आदर्शों वाले, विद्वान, शिक्षक, कवि, लेखक, नेता, मंत्री, न्यायप्रिय और धर्मपरायण होते हैं. ऐसे लोग तपस्वी, योगी, ज्ञानी और भगवान विष्णु के भक्त माने जाते हैं. मैं क्रोध पर नियंत्रण रखने वाला सौम्य ग्रह हूं, इसलिए अधिक कुपित होने पर भी बहुत बड़ा अनिष्ट नहीं करता.
जो लोग, विशेषकर महिलाएं, गुरुवार के दिन व्रत-उपासना करती हैं, पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले पदार्थों का भोग लगाकर परिवार में बांटती हैं, उन पर मैं अत्यंत प्रसन्न होता हूं और उन्हें सुख, सौभाग्य, पुत्र-पौत्र तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता हूं.
मैं व्यक्ति को अनुष्ठान करने की शक्ति और प्रेरणा देता हूं. मेरे कुपित होने पर मनुष्य ज्ञानहीन, शिक्षा से वंचित और शक्तिहीन हो जाता है. गुरुवार के दिन जन्म लेने वाला व्यक्ति जीवन के विशेष वर्षों में शुभ-अशुभ प्रभावों का अनुभव करता है और सामान्यतः दीर्घायु होता है. पूर्ण शुभ स्थिति में मैं 115 वर्ष से अधिक आयु का आशीर्वाद भी देता हूं.
मेरे वार के दिन ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा आरंभ, धर्म-कर्म, न्याय, अनुष्ठान और ग्रहशांति जैसे कार्य करने से सफलता प्राप्त होती है. चने की दाल खाना, केसर मिश्रित मिठाई का सेवन और दान करना, तथा गाय को पीली रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. शरीर में मैं मस्तिष्क का कारक हूं.
कुंडली में प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, दशम और एकादश भाव में मैं शुभ फल प्रदान करता हूं। धनु और मीन राशि का स्वामी मैं ही हूं. कर्क मेरी उच्च राशि तथा मकर मेरी नीच राशि मानी जाती है. मेरी पंचम, सप्तम और नवम दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उसके महत्व और शुभता को बढ़ा देती है. मंगल और सूर्य मेरे मित्र ग्रह हैं, जबकि शुक्र को मेरा शत्रु माना गया है.
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