अमेरिका ईरान में 9 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद भी होर्मुज स्ट्रेट काफी हद तक बंद है. इसकी वजह से अभी भी समुद्री आवागमन प्रभावित हो रहा है. ऐसे माहौल में भी भारत से जुड़े जहाज इस जोखिम भरे मार्ग से गुजर रहे हैं, इस कारण गंभीर व्यवधानों के बावजूद भारत को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है.
होर्मुज से गुजर रहे भारत के जहाज
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का भौगोलिक रूप से काफी दबदबा है और उसने 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में बार-बार जहाजों को निशाना बनाया है. शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत इस तनावपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को कैसे मैनेज कर रहा है, हालांकि उन्होंने परिचालन संबंधी डिटेल्स नहीं दी.
अधिकारी ने क्या बताया?
जहाजरानी निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि भारत और ईरान के साथ समन्वय और प्राथमिकता के बारे में स्पष्ट कारणों से मैं अभी विस्तार से नहीं बताना चाहूंगा, लेकिन हम विदेश मंत्रालय के माध्यम से समन्वय करते हैं और यही हमारी वर्तमान स्थिति है. उन्होंने बताया कि ऊर्जा और आवश्यक आपूर्ति से जुड़े प्रमुख मंत्रालयों के साथ मिलकर जहाजों की प्राथमिकता तय की जाती है.
होर्मुज में अभी कितने भारतीय जहाज?
उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकता के संबंध में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) और उर्वरक मंत्रालय के समन्वय से निर्णय लिया जाता है और उसके बाद प्राथमिकताएं तैयार कर हम जहाजों को बाहर निकालने का प्रयास करते हैं. शर्मा के अनुसार वर्तमान में होर्मुज में लगभग 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं. इनमें एक एलपीजी टैंकर, 5 कच्चे तेल के टैंकर, एक रसायन या उत्पाद टैंकर, 3 कंटेनर जहाज, 2 बल्क कैरियर और 1 ड्रेजर शामिल हैं.
होर्मुज से कितने भारतीय जहाज गुजरे?
खतरे के बावजूद भारत ने इस मार्ग से समुद्री यातायात जारी रखा है और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सबसे अधिक संख्या वाले देशों में शामिल है. 28 फरवरी से इस जलमार्ग को पार करने वाले भारतीय जहाजों में शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर, बीडब्ल्यू एल्म और ग्रीन सानवी शामिल हैं.
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