अमेरिका के मुकाबले चीन को एक सर्वे में बेहतर स्थिति में दिखाया गया है. हाल ही में Pew Research Center ने साल 2026 की शुरुआत में 36 देशों में सर्वे किया. इनके अलावा ट्रंप और जिनपिंग के बारे में देशों के राष्ट्राध्यक्षों को लेकर भी आम जन की राय जानी गई.
Pew की हाल ही में जारी सर्वे 36 देशों और इन्हीं इलाकों के 42,151 व्यस्कों के बीच 8 फरवरी से 13 मई 2026 के दौरान किया गया था. इसमें पता चला था कि कई जगहों पर चीन के बारे में अच्छी राय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. वहीं अमेरिका के बारे में लोगों की राय खराब हुई है. इन्हीं 36 में से 25 देशों में लोगों ने कहा कि उनकी चीन के बारे में राय अमेरिका के मुकाबले बेहतर है.
इसके अलावा सर्वे में शामिल लोगों से जाना गया कि हर महाशक्ति के बारे में उनकी राय अच्छी है. कुछ हद तक अच्छी और कुछ हद तक खराब या बहुत खराब है. इन देशों में स्पेन, इंडोनेशिया, इटली, ग्रीस और कनाडा जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में चीन को लेकर लोगों का नजरिया बदला है.
यानी अमेरिका के पड़ोसी कनाडा और मैक्सिको के लोग भी अमेरिका की तुलना में चीन को ज्यादा सकारात्मक रूप से लेते हैं. इनके अलावा 6 ऐसे देश हैं, जो अमेरिका को सकारात्मक लेते हैं. इनमें पोलैंड, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, भारत, जापान और इजरायल शामिल हैं. हालांकि, यह सभी देश या तो पुराने पार्टनर हैं, या एक दूसरे के सहयोगी हैं.
कई देशों में अमेरिका के बारे में अच्छी राय में कमी आई है
इसके अलावा Pew के एक ट्रेंड से पता चला है कि हाल के सालों में कई देशों में अमेरिका के बारे में अच्छी राय में कमी आई है. चीन के बारे में अच्छी राय में इजाफा हुआ है. मध्यम आय वाले देश चीन के प्रति ज्यादा सकारात्मक रुख ररख रेह हैं, जबकि अमीर देशों में चीन को लेकर फिलहाल शक बना हुआ है. चीन के लिए सबसे सही रेटिंग एशिया के पैसिफिक और डेवलपिंग देशों से मिली है. इनमें पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, नाइजीरिया और तुर्की शामिल हैं. यह चीन की छवि अच्छी है.
वहीं यूरोप, एशिया पैसिफिक के कुछ उच्च आय वाले देश चीन को लेकर नकारात्मक नजरिया रखे हुए हैं. यह देश अमेरिका को लेकर भी ज्यादा कुछ नहीं सोच रहे हैं. इधर, सिंगापुर का सकारात्मक झुकाव भी चीन की तरफ देखने को मिला है.
जिनपिंग और ट्रंप में कौन सबसे ज्यादा भरोसेमंद?
देशों के अलावा दोनों राष्ट्रों के सत्ताधीश के बारे में भी सर्वे में राय ली गई है. इसमें शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसे की तुलना भी की गई है. इसमें पाया है कि दोनों नेताओं में कुल मिलाकर भरोसा कम है. ज्यादातर देशों में दोनों नेताओं के लिए भरोसे का स्कोर 50 प्रतिशत से कम है. यह उनके इंटरनेशनल डिसीजन के तरीकों पर बड़े पैमाने पर शक को दिखाता है. इसके बावजूद ज्यादातर देशों में ट्रंप के मुकाबले शी पर ज्यादा भरोसा जताया गया है. सर्वे में 36 देशों और इलाकों में से 22 में ट्रंप के मुकाबले शी के बारे में लोगों की राय ज्यादा अच्छी है. इनमें कनाडा, मेक्सिको और फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम जैसे बड़े यूरोपीय देश शामिल हैं. हालांकि, शी पर भरोसे की सबसे ज्यादा रेटिंग पाकिस्तान से मिली है. करीबन 83 प्रतिशत लोगों ने शी जिनपिंग का समर्थन किया है. वहीं, जापान में सबसे कम 7 प्रतिशत शी पर भरोसा जताया गया है.
ट्रंप की रेटिंग में भी बहुत अंतर दिखाई दिया है. उन्हें सबसे ज्यादा रेटिंग फिलीपींस से 68 प्रतिशत मिली है. वहीं, सबसे कम वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम से सबसे कम 4 प्रतिशत ही मिली है. कई देशों में खासकर यूरोप में किसी भी नेता को बहुमत जितना समर्थन नहीं मिला है. फिर भी शी ट्रंप से काफी आगे हैं.
दोनों देशों को लेकर भारतीयों की क्या राय?
इस मामले में जब भारतीयों से पूछा गया कि अमेरिका और चीन में किसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, तो भारत के लोगों ने अमेरिका की तरफ अपना पक्ष रखा है. 45 प्रतिशत भारतीयों ने अमेरिका से खुद को प्रभावित बताया है. वहीं, चीन को 23 प्रतिशत दिए हैं. इसके अलावा शी जिनपिंग पर 25 प्रतिशत भारतीयों ने भरोसा जताया है, तो वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर 39 प्रतिशत भारतीयों ने भरोसा जताया है.
व्यक्तिगत आजादी में चीन से बेहतर अमेरिका
हालांकि, एक जगह अमेरिका को चीन से बेहतर माना गया है. वो है व्यक्तिगत आजादी का सम्मान. इसके अलावा विदेश नीति की भूमिकाओं पर भी दोनों देशों को लेकर सवाल किया गया. इनमें कई लैटिन अमेरिकी और मध्यम आय वाले देश शामिल थे. इन पर लोग चीन के मुकाबले अमेरिका को ज्यादा भरोसेमंद साथी मानते थे. हाल के नतीजों से पता चला है कि अब लोगों की राय बंट गई है.
दूसरे देशों में दखलअंदाजी को लेकर सवाल किया गया है, तो उसमें 75 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि अमेरिका दूसरे देशों के मामलों में बहुत ज्यादा या काफी हद तक दखल देता है. जबकि चीन को लेकर 45 प्रतिशत लोगों का ही ऐसा मानना है कि चीन इस तरह से किसी भी देश की नीतियों में दखल देने में भूमिका रखता हो.
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