आंध्र प्रदेश HC के जज के खिलाफ CJI के पास पहुंचा बार काउंसिल, तत्काल कार्रवाई की मांग

आंध्र प्रदेश HC के जज के खिलाफ CJI के पास पहुंचा बार काउंसिल, तत्काल कार्रवाई की मांग


बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की ओर से कथित तौर पर एक युवा वकील को प्रक्रियात्मक चूक के कारण 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की बेहद चिंताजनक घटना पर बुधवार (6 मई, 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने एक औपचारिक अभ्यावेदन में जस्टिस तरलादा राजशेखर राव के आचरण को ‘अत्यंत अनुचित’ और ‘बार के विश्वास को नुकसान पहुंचाने वाला’ बताया.

उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अत्यंत विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि कृपया इस मामले का तत्काल संस्थागत संज्ञान लें और कार्यवाही, पारित आदेश आदि की वीडियो रिकॉर्डिंग मंगवाएं.’ मनन कुमार मिश्रा ने लिखा, ‘मैं अनुरोध करता हूं कि समीक्षा लंबित रहने तक विद्वान न्यायाधीश से न्यायिक कार्य वापस लेने, उनका तत्काल किसी दूरस्थ हाईकोर्ट में स्थानांतरण करने और न्यायालय प्रबंधन, न्यायिक बर्ताव, बार-बेंच संबंधों और अवमानना/न्यायिक अधिकार के आनुपातिक प्रयोग पर उचित न्यायिक प्रशिक्षण/अभिविन्यास के लिए उन्हें नामित करने सहित उचित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जाए.’

उन्होंने कहा कि यह निवेदन न्यायपालिका की ‘गरिमा, नैतिक अधिकार और जनता के विश्वास’ को बनाए रखने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा, ‘न्यायाधीश भय से नहीं, बल्कि निष्पक्षता, धैर्य, संयम और संवैधानिक विनम्रता से सर्वोच्च सम्मान के पात्र होते हैं.’ इस पत्र में मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया गया है कि वह जल्द से जल्द हस्तक्षेप करें ताकि बार एसोसिएशन, विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं का न्यायपालिका की सुरक्षात्मक और सुधारात्मक भूमिका में विश्वास बहाल हो सके.

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यह विवाद पांच मई की कार्यवाही से जुड़ा है. बीसीआई के अनुसार, ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में न्यायमूर्ति राव एक युवा वकील को फटकार लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो सुनवाई के दौरान एक विशिष्ट आदेश की प्रति पेश नहीं कर सका.

पत्र में कहा गया है कि वकील की ओर से बार-बार क्षमा मांगने और दया की गुहार लगाने और यह कहने के बावजूद की वह शारीरिक पीड़ा से गुजर रहा है, जज पर कोई असर नहीं पड़ा. जज ने वकील से कथित रूप से कहा, ‘अब तुम सीखोगे’ और उसके अनुभव का मजाक उड़ाते हुए रजिस्ट्रार और पुलिस कर्मियों को उसे 24 घंटे के लिए हिरासत में लेने का निर्देश दिया.

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बीसीआई के अध्यक्ष ने कहा कि न्यायाधीश की कार्रवाई में आनुपातिकता और निष्पक्षता का अभाव था. पत्र में कहा गया, ‘अदालत की गरिमा तब नहीं बढ़ती जब एक वकील को खुली अदालत में दया की भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है और फिर भी उसे प्रक्रियात्मक चूक के लिए हिरासत में भेज दिया जाता है.’ इसमें कहा गया है, ‘एक युवा वकील… न्यायालय का एक अधिकारी है, जो अब भी सीख रहा है, अब भी विकसित हो रहा है, और बिना अपमान के सुधार का हकदार है.’ 



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