आखिर कब कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? पेट्रोलियम मंत्री के खुलासे के बीच जानें आज का रेट

आखिर कब कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? पेट्रोलियम मंत्री के खुलासे के बीच जानें आज का रेट


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  • पेट्रोलियम मंत्री ने सस्ते क्रूड से कीमत घटने के संकेत दिए.
  • सरकार ने शुल्क घटाकर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा.
  • कंपनियों के पास अभी महंगे क्रूड तेल का स्टॉक मौजूद.
  • कच्चे तेल, टैक्स से ईंधन कीमतें निर्धारित होती हैं.

Petrol-Diesel Rate on June 22: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस बात का संकेत दे चुके हैं कि जैसे ही सस्ता क्रूड ऑयल भारत पहुंचेगा, तेल की कीमतों में कमी आ सकती है. हालांकि इसमें अभी थोड़ा समय लग सकता है. उत्तर प्रदेश में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने कहा, ”अभी कंपनियों के पास ज्यादा कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल का स्टॉक है, जैसे ही कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल उनके पास पहुंचेगा, तो कीमत में कमी आने की संभावना है.”

उन्होंने आगे यह भी कहा, ”अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग के माहौल में ग्लोबल एनर्जी संकट के बावजूद दूसरे देशों के मुकाबले भारत में ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं और बेहतर स्थिति में हैं.” पुरी ने बताया कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें न बढ़े इसके लिए सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और फिर 2026 में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है और इसके चलते ईंधन की कीमतों पर प्रति लीटर 10 रुपये के नुकसान का असर खुद उठाया है. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 7.60 रुपये प्रति लीटर तक ही सीमित रही है.

आज कितनी है कीमत?

शहर पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली 102.12 रुपये 95.20 रुपये
मुंबई  111.18 रुपये 97.83 रुपये
कोलकाता 113.47 रुपये 99.82 रुपये
चेन्नई 107.77 रुपये  99.55 रुपये
बेंगलुरु 110.93 रुपये 98.80 रुपये
हैदराबाद 115.69 रुपये 103.82 रुपये
अगरतला 105.17 रुपये  94.05 रुपये
गुवाहाटी 105.85 रुपये  97.33 रुपये
पटना 113.35 रुपये 99.36 रुपये

कैसे तय होती है देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत? 

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, बेस प्राइस, टैक्स और डीलर के कमीशन के आधार पर तय होती हैं.

कच्चे तेल की कीमत, उसकी रिफाइनिंग पर हुए खर्च, माल ढुलाई की लागत और अपने मुनाफे को जोड़कर तेल कंपनियां एक बेस प्राइस तय करती हैं. इसके बाद ग्राहकों तक पहुंचाने से पहले इन पर भारी टैक्स और कमीशन लगाया जाता है, जो रिटेल प्राइस का लगभग 50-55% तक होता है. राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट (VAT) वसूलती हैं. इसके अलावा, पेट्रोल पंप मालिकों को उनके खर्च और मुनाफे के लिए प्रति लीटर के हिसाब से एक निश्चित कमीशन दिया जाता है. इन सभी को जोड़कर एक फाइनल प्राइस पर पहुंचा जाता है. 

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