Allahabad High Court History: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की न्याय व्यवस्था को नए ढांचे में ढालने के लिए 1861 का इंडियन हाई कोर्ट्स एक्ट एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. इसी कानून के तहत देश में पुराने न्यायालय की जगह हाई कोर्ट्स स्थापित किए गए. इसी क्रम में 17 मार्च 1866 को उत्तर पश्चिमी प्रांतों के लिए एक नए हाईकोर्ट की स्थापना का रास्ता साफ हुआ, जिसने पुराने सदर दीवानी अदालत की जगह ली. यही अदालत आगे चलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के रूप में विकसित हुई, जो आज भी देश के प्रमुख न्यायालय में गिनी जाती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का पहला जज कौन था और तब उन्हें कितनी सैलरी मिलती थी.
कौन थे इलाहाबाद हाई कोर्ट के पहले चीफ जस्टिस?
उस समय नए बने इस हाई कोर्ट के पहले चीफ जस्टिस सर वॉल्टर मॉर्गन थे. उनके साथ जिनकी नियुक्ति हुई उनमें एलेक्जेंडर रॉस, विलियम रॉबर्ट्स, फ्रांसिस बॉयल पियर्सन और चार्ल्स आर्थर टर्नर शामिल थे. इन जजों में कई पहले से ही सदर दीवानी अदालत में काम कर चुके थे. इसलिए नए कोर्ट के कामकाज में एक्सपीरियंस की कमी नहीं थी. सर वॉल्टर मॉर्गन की उम्र उस समय करीब 45 साल थी और वह इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई के बाद भारत आए थे. उन्होंने पहले कोलकाता हाई कोर्ट में भी जज के रूप में काम किया और बाद में उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के इस नए हाईकोर्ट के पहले चीफ जस्टिस बने. उन्होंने 1866 से 1871 तक इस पद पर रहते हुए काम किया. वहीं इस हाई कोर्ट की स्थापना 1866 में हो गई थी, लेकिन शुरुआत में इसका काम काज आगरा से संचालित होता था. इसके बाद धीरे-धीरे कोर्ट को इलाहाबाद शिफ्ट किया गया और 1868 से 69 के आसपास यहां इसकी पूरी तरह स्थापना हो चुकी थी.
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उस समय जजों की सैलरी कितनी थी?
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर ब्रिटिश दौर की सैलरी की बात करें तो हाई कोर्ट के जजों को हर महीने करीब 3,750 मिलते थे. जबकि चीफ जस्टिस की सैलरी 5000 प्रति माह थी. उस समय भारत में इनकम टैक्स नहीं था, इसलिए रकम काफी बड़ी मानी जाती थी.
आजाद भारत में इलाहाबाद हाई कोर्ट का पहला जज
1947 में देश को आजाद होने के बाद बिधु भूषण मलिक को इलाहाबाद हाई कोर्ट का पहला चीफ जस्टिस बनाया गया. उन्होंने 1947 से 1955 तक काम किया. वहीं उन्होंने कॉलोनियल दौर से आजाद भारत के कॉन्स्टिट्यूशनल फ्रेमवर्क तक के जरूरी बदलाव के दौरान उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत में ज्यूडिशियरी को गाइड किया.
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