Miyazaki Mango Farming: गर्मियों का सीजन आते ही हर घर में बस एक ही चीज का सबसे ज्यादा इंतजार होता है और वो है फलों का राजा आम. इस मौसम में लोग आम खाने का कोई बहाना नहीं छोड़ते चाहे सुबह का नाश्ता हो या रात का डिनर, आम हर थाली की शान बन जाता है. भारत में लोग गर्मियों के दौरान कई क्विंटल आम खा जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कोई एक आम लाखों रुपये का भी हो सकता है?
तो आपको बता दें ओडिशा के मलकानगिरी के रहने वाले किसान देबा मदकामी के बाग में इन दिनों दुनिया का सबसे महंगा आम मियाज़ाकी मैंगो, पककर तैयार हो रहा है. जापान की इस दुर्लभ वैरायटी की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है. चलिए जानते हैं कि इस लाखों रुपये के आम के साथ किसान की कौन सी बड़ी टेंशन जुड़ गई है.
दुनिया का सबसे महंगा आम ओडिशा में
जापान की सरज़मीन से निकलकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरने वाला मियाज़ाकी आम अब भारत के ओडिशा राज्य में भी अपनी चमक बिखेर रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में लाखों रुपये किलो बिकने वाले इस दुर्लभ आम की खेती करके मलकानगिरी के किसान देबा मदकामी ने हर किसी को हैरान कर दिया है.
लाल और बैंगनी रंग की खूबसूरत रंगत वाले इस आम का दीदार करने के लिए दूर-दूर से लोग इस छोटे से गांव में पहुंच रहे हैं. इस कीमती फल की खुशबू और इसका भारी-भरकम वजन इस समय पूरे इलाके में टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है.
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रात-भर जागकर रखवाली
देबा मदकामी के बाग में लगे ये कीमती आम आजकल उनकी रातों की नींद उड़ा रहे हैं. उन्हें न तो किसी चक्रवाती तूफान का डर है और न ही जंगली जानवरों का बल्कि उन्हें सबसे बड़ा खतरा चोरों से है जो इस बेशकीमती फसल पर नजर गड़ाए बैठे हैं.
अपनी लाखों की इस फसल को सुरक्षित रखने के लिए देबा के पास कोई हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम नहीं है. वह बस इतना कर पा रहे हैं कि बाग के बीचों-बीच एक चारपाई बिछाकर खुले आसमान के नीचे हफ्तों से रात गुजार रहे हैं.
चार साल का लंबा इंतजार
देबा के बाग में दिख रही यह सुनहरी रंगत रातों-रात नहीं आई है. बल्कि इसके पीछे चार साल की लंबी देखभाल और सब्र की कहानी है. इस दिलचस्प सफर की शुरुआत तब हुई जब समाज-सेवी सरबा कुमार बिसोई भुवनेश्वर से इसके कुछ पौधे लाए थे. उनके पास पर्याप्त जमीन नहीं थी. इसलिए उन्होंने ये पौधे देबा को सौंप दिए. देबा ने पूरी लगन से इन्हें पाला और इस साल पेड़ों पर बंपर फल आ गए.
बेचने की परेशानी
हालांकि देबा की एक चिंता यह भी है कि वे इतने महंगे आमों को आखिर कहां और किसे बेचेंगे क्योंकि लोकल मार्केट में खरीदार मिलना नामुमकिन है. वे भविष्य में इसकी खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ाना तो चाहते हैं. लेकिन सही मार्केट और सुरक्षा उनके लिए अब भी सबसे बड़ा चैलेंज बनी हुई है.
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