एक महीने में 200 रुपये चढ़ा गेहूं, अगली फसल पर मंडरा रहा El Nino का खतरा

एक महीने में 200 रुपये चढ़ा गेहूं, अगली फसल पर मंडरा रहा El Nino का खतरा


गेहूं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. पिछले एक महीने में कई मंडियों में गेहूं के भाव करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल तक चढ़ गए हैं और कुछ जगहों पर भाव 2850 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गए हैं. आटा भी 34 से 35 रुपये किलो के भाव पर बिक रहा है. सवाल यह है कि जब देश में इस साल गेहूं की रिकॉर्ड फसल हुई है तो फिर कीमतों में तेजी क्यों है?

आमतौर पर गेहूं की कीमत बढ़ने पर वजह निर्यात, स्टॉक या मंडी में कम आवक को माना जाता है. इस बार भी इन वजहों का असर है लेकिन आने वाले महीनों के लिए एक और बड़ा जोखिम सामने है. यह जोखिम मंडी से हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में है और इसका नाम है El Nino. 

El Nino क्या है और गेहूं से इसका क्या कनेक्शन है?

जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है तो दुनिया के कई हिस्सों के मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है. कहीं सूखा पड़ता है तोकहीं ज्यादा बारिश होती है और कई जगह तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है. इसी मौसमी घटना को El Nino कहा जाता है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी कि मौजूदा El Nino आने वाले महीनों में मजबूत होकर बहुत मजबूत स्थिति में जा सकता है और फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. भारत के लिए इसका असर सिर्फ मॉनसून तक सीमित नहीं है क्योंकि गेहूं की बुवाई मॉनसून के बाद होती है और फसल का सबसे संवेदनशील दौर फरवरी-मार्च में आता है.

तेजी के पीछे चार बड़ी वजहें – 

निर्यात खुलने से बाजार को मिला तेजी का संकेत

24 अगस्त को सरकार ने करीब चार साल बाद गेहूं का निर्यात पूरी तरह खोल दिया. गेहूं के साथ आटा, मैदा, सूजी और होलमील आटा भी फ्री एक्सपोर्ट कैटेगरी में आ गए. निर्यात खुलने के बाद घरेलू बाजार में तेजी देखने को मिली और कारोबारियों के मुताबिक थोक भाव 200 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा चढ़े हैं.

MSP बढ़ने की उम्मीद में स्टॉक हो रहा है होल्ड

अगले रबी सीजन का MSP अभी घोषित नहीं हुआ है लेकिन बाजार को उम्मीद है कि सरकार गेहूं का MSP बढ़ा सकती है. इस उम्मीद में किसान और कारोबारी स्टॉक रोककर रखने लगते हैं. इसका सीधा असर मंडी की आवक पर पड़ता है और कम उपलब्धता के कारण भाव ऊपर जाने लगते हैं.

कम मंडी आवक ने भी बढ़ाया दबाव

सितंबर गेहूं के लिए वैसे भी कमजोर आवक वाला समय है. ऐसे में जब बाजार को लगता है कि आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं तो स्टॉक बेचने की रफ्तार धीमी हो जाती है यानी फिलहाल देश में गेहूं की कमी नहीं है लेकिन बाजार में बिक्री के लिए आने वाला गेहूं कम हो रहा है.

वैश्विक बाजार और काला सागर का तनाव

रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर क्षेत्र में तनाव का असर वैश्विक गेहूं व्यापार पर भी पड़ रहा है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं महंगा रहता है और भारत में निर्यात खुला हुआ है तो घरेलू कीमतों पर भी ऊपर जाने का दबाव बनता है.

El Nino आगे कैसे बढ़ा सकता है गेहूं के दाम?

आज की तेजी और अगली फसल का जोखिम दो अलग-अलग बातें हैं. El Nino का असली असर आने वाले महीनों में गेहूं की फसल पर दिखाई दे सकता है और इसके तीन अहम पड़ाव होंगे.

पहला पड़ाव- नवंबर की बुवाई

गेहूं की बुवाई अक्टूबर के आखिर से नवंबर के दौरान होती है. इससे पहले जमीन में नमी और जलाशयों में पानी की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होगी. इस साल 9 सितंबर तक देश में बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है. अगर बारिश की कमी और कमजोर जलस्तर का असर रबी सीजन तक बना रहा तो किसानों को सिंचाई पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है.

अगर पानी की उपलब्धता और लागत का दबाव बढ़ा तो बुवाई का रकबा प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में बाजार फसल आने से महीनों पहले ही अगले साल की सप्लाई को लेकर चिंता दिखाना शुरू कर सकता है.

दूसरा पड़ाव- फरवरी-मार्च की गर्मी

गेहूं के लिए सबसे बड़ा मौसम जोखिम फरवरी और मार्च में पैदा होता है. इस दौरान फसल में फूल आने और दाना भरने का चरण होता है. तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ने पर फसल का पकने का समय कम हो सकता है और दाने का वजन घट सकता है. इसे Terminal Heat Stress कहा जाता है.

भारत में सर्दियां पहले ही गर्म और छोटी होती जा रही हैं. Climate Trends के अध्ययन के मुताबिक फरवरी से अप्रैल के बीच तापमान बढ़ने की दर चिंता का विषय है. अगर El Nino की वजह से इस दौरान गर्मी और बढ़ी तो गेहूं की फसल पर दबाव बढ़ सकता है.

तीसरा पड़ाव – अप्रैल की सरकारी खरीद

अगर अगली फसल कमजोर रहती है तो सरकारी खरीद भी प्रभावित हो सकती है. खरीद कम होने का मतलब FCI के पास आने वाला स्टॉक कम होना है. सरकारी बफर स्टॉक ही वह सबसे बड़ी ढाल है, जिसके जरिए सरकार जरूरत पड़ने पर बाजार में गेहूं उतारकर कीमतों को नियंत्रित कर सकती है.

सरकार के पास OMSS के जरिए गेहूं बेचने, स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाने और जरूरत पड़ने पर सस्ती दरों पर गेहूं या आटा उपलब्ध कराने के विकल्प हैं. जरूरत पड़ने पर निर्यात पर दोबारा रोक भी लगाई जा सकती है लेकिन यह ढाल तभी मजबूत रहेगी जब सरकारी गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद होगा.

क्या आटा अभी और महंगा होगा?

फिलहाल तुरंत बड़ी तेजी का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी. 2025-26 फसल वर्ष में देश में रिकॉर्ड करीब 120.65 मिलियन टन गेहूं पैदा हुआ है. इसका मतलब है कि अभी देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

निर्यात खुलने के बावजूद यह जरूरी नहीं है कि बड़ी मात्रा में गेहूं तुरंत विदेश चला जाए. भारतीय गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई सप्लायरों के मुकाबले महंगा है. इसलिए अगले कुछ महीनों में कीमतों पर वास्तविक निर्यात से ज्यादा असर बाजार की धारणा और स्टॉकिंग का हो सकता है.

असली इम्तिहान मार्च के बाद

अगर सर्दी सामान्य रही ,फसल अच्छी हुई और सरकारी खरीद मजबूत रही तो मौजूदा तेजी सीमित रह सकती है लेकिन अगर फरवरी-मार्च में तापमान तेजी से बढ़ा और फसल को नुकसान हुआ तो कहानी बदल सकती है.

2022 में भी मार्च की असामान्य गर्मी ने गेहूं की फसल पर असर डाला था और उसके बाद सरकार को निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी. हालांकि उस समय परिस्थितियां अलग थीं और मौजूदा स्टॉक की स्थिति भी अलग है इसलिए दोनों वर्षों की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा.

किसान के लिए भी दोधारी तलवार है बढ़ता भाव

गेहूं के बढ़ते भाव किसान के लिए राहत की खबर हैं. रिकॉर्ड उत्पादन वाले साल में अगर मंडी भाव MSP से ऊपर मिलता है तो किसान को फायदा होता है. लेकिन मौसम का जोखिम इस फायदे को उलट भी सकता है.

ऊंचे भाव देखकर किसान ज्यादा रकबे में गेहूं बो सकता है और बीज-सिंचाई पर ज्यादा खर्च कर सकता है. अगर फरवरी-मार्च की गर्मी ने उपज घटा दी तो लागत बढ़ने के बावजूद उत्पादन कम हो सकता है यानी ऊंचा भाव तभी फायदा है जब फसल भी अच्छी निकले.

अब बाजार किन संकेतों पर नजर रखेगा?

अक्टूबर में अगले रबी सीजन के MSP पर नजर होगी. इसके बाद नवंबर में गेहूं की बुवाई और रकबे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी. दिसंबर से फरवरी के बीच तापमान और सर्दी का रुख सबसे अहम संकेत देगा. मार्च में फसल की शुरुआती स्थिति और अप्रैल में सरकारी खरीद के आंकड़े बताएंगे कि अगली फसल का वास्तविक गणित क्या है.

सीधी बात- आज की तेजी ट्रेलर, असली कहानी मौसम की

आज गेहूं इसलिए महंगा नहीं है कि देश में गेहूं खत्म हो गया है. निर्यात खुलने, MSP बढ़ने की उम्मीद और कम मंडी आवक ने मौजूदा तेजी को हवा दी है लेकिन बाजार की नजर अगली फसल पर है.

El Nino आज की तेजी का सीधा कारण नहीं है. यह आने वाले महीनों का मौसम जोखिम है जिसे बाजार अभी से कीमतों में जोड़ रहा है. अगर मौसम सामान्य रहा तो रिकॉर्ड स्टॉक और सरकारी बफर कीमतों को संभाल सकते हैं लेकिन अगर El Nino ने सर्दी गर्म कर दी और गेहूं की पैदावार घट गई तो आज के 200 रुपये की तेजी सिर्फ शुरुआत साबित हो सकती है.



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