किसान अपनाएं ये मार्केटिंग स्ट्रैटजी, मंडी के गिरते भावों का नहीं होगा असर

किसान अपनाएं ये मार्केटिंग स्ट्रैटजी, मंडी के गिरते भावों का नहीं होगा असर


किसानों के लिए फसल का उत्पादन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसकी सही कीमत पर बिक्री करना भी है. कई बार अच्छी पैदावार के बावजूद मंडियों में भाव गिरने की वजह से किसानों को उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिल पाता. ऐसे में किसानों के लिए केवल मंडी पर निर्भर रहने के बजाय बेहतर मार्केटिंग रणनीति अपनाना फायदेमंद होता है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ मार्केटिंग स्ट्रैटजीज के बारे में.

एक ही बाजार पर निर्भर न रहें

फसल तैयार होने के बाद किसान अक्सर स्थानीय मंडी में ही उपज बेचते हैं. इससे उन्हें तत्काल भुगतान तो मिल जाता है, लेकिन कई बार स्थानीय बाजार में भाव कमजोर होने पर नुकसान भी उठाना पड़ता है. ऐसे में किसानों को आसपास की दूसरी मंडियों, थोक खरीदारों, और सीधे खरीद करने वाले व्यापारियों जैसे बेहतर विकल्पों के बारे में जानना चाहिए. आज डिजिटल माध्यमों की मदद से अलग-अलग बाजारों में चल रहे भावों की जानकारी लेना पहले की तुलना में आसान हो गया है.

फसल की ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर दें ध्यान

एक जैसी दिखने वाली पूरी फसल को एक साथ बेचने के बजाय गुणवत्ता के आधार पर उसकी ग्रेडिंग करना भी किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकता है. अच्छी गुणवत्ता वाली उपज को अलग करने से उसे बेहतर खरीदार और बेहतर कीमत मिलती है. साफ-सफाई, उचित पैकिंग और सही भंडारण भी महत्वपूर्ण हैं. वहीं फल, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाली फसलों में अच्छी पैकेजिंग से नुकसान कम किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: गांव में कैसे खोल सकते हैं पशु औषधि केंद्र, कितना पढ़ा-लिखा होना जरूरी?

सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाने की कोशिश

जहां संभव हो, किसान स्थानीय ग्राहकों, दुकानदारों, होटल और रेस्टोरेंट से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इससे बिचौलियों की संख्या कम होती है और किसान को बाजार की वास्तविक मांग समझने का अवसर मिलता है. किसान उत्पादक संगठन यानी FPO के माध्यम से सामूहिक बिक्री भी एक बेहतरीन विकल्प है. कई किसानों की उपज एक साथ उपलब्ध होने पर बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले कारोबारियों से बातचीत करना आसान हो जाता है.

बाजार की मांग के हिसाब से करें योजना

मार्केटिंग केवल फसल बेचने तक सीमित नहीं है. किसान बुवाई से पहले ही यह पता लगाने की कोशिश करना चाहिए कि किस फसल की मांग किस समय अधिक रहती है. स्थानीय बाजार और उपभोक्ताओं की पसंद को समझकर फसल विविधीकरण की योजना बनाना बेहतर होता है.

यह भी पढ़ें: शुगर फ्री मिठास के लिए घर पर लगाएं ये पौधा, डायबिटीज के लिए बेस्ट



Source link