- बैकयार्ड कुक्कुट योजना ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाएगी.
- सरकार मुफ्त 45 चूजे और दाना उपलब्ध कराएगी.
- महिला समूहों को प्राथमिकता, 6-8 हजार मासिक कमाएं.
अगर आप गांव में रहकर अपनी कमाई का कोई नया जरिया तलाश रहे हैं. तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है. अब आपको बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों रुपये लगाने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार की बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना छोटे स्तर पर मुर्गी पालन शुरू करने का शानदार मौका दे रही है. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपको अपनी जेब से कोई भारी भरकम पूंजी नहीं लगानी.
पशुधन विकास विभाग खुद आपको 45 उन्नत नस्ल के चूजे और शुरुआती देखभाल के लिए 10 किलो पौष्टिक दाना बिल्कुल मुफ्त मुहैया करा रहा है. यानी इस योजना के जरिए ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं और युवाओं को अपने बिजनेस को शुरू करने के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा. घर के खाली पड़े बाड़े में इन चूजों को पालकर आप रोजमर्रा के अंडे और देसी चिकन बेचकर हर महीने एक अच्छी इनकम हासिल कर सकते हैं. जानें योजना के बारे में जानकारी.
क्या है कुक्कुट पालन योजना?
अक्सर लोगों को लगता है कि मुर्गी पालन करने के लिए बहुत बड़े शेड, महंगे इक्विपमेंट्स और भारी बजट की जरूरत पड़ती है. लेकिन बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना का मॉडल बिल्कुल अलग और बेहद आसान है. इसमें आपको कोई फैंसी सेटअप नहीं बनाना पड़ता. बल्कि घर के पीछे खाली पड़ी जमीन, आंगन या छोटे से बाड़े में ही काम शुरू हो जाता है. सरकार की ओर से जो 45 चूजे दिए जाते हैं.
वे चूजे सामान्य नहीं बल्कि तेजी से बढ़ने वाली और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली उन्नत नस्ल के होते हैं. इसके साथ ही शुरुआती दिनों में चूजों की सही ग्रोथ के लिए 10 किलोग्राम दाना भी फ्री मिलता है. इससे नए पालक पर शुरुआत में दाने का कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता. जब चूजे थोड़े बड़े हो जाते हैं तो वे घर के बचे खाने, हरी पत्तियों और कीड़े-मकोड़ों पर आसानी से पल जाते हैं जिससे आपका मेंटेनेंस खर्च बिल्कुल ना के बराबर रह जाता है.
महिलाओं को मिल रहा बड़ा मौका
यह योजना छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शुरू की गई है. वहां जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग ने मिलकर गादीरास क्षेत्र के कई गांवों जैसे मनकापाल, नागलगुंडा, सोनाकूकानार, डोडपाल और कोर्रा में इस योजना को शुरू किया है. कलेक्टर अमित कुमार और उपसंचालक डॉ. संदीप इंदुरकर की देखरेख में आयोजित शिविरों के जरिए पात्र परिवारों को सीधे 45-45 चूजे और दाना बांटे जा रहे हैं.
इस योजना में महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों को प्राथमिकता दी जा रही है. महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ बहुत आसानी से इन मुर्गियों की देखरेख कर रही हैं. इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं को सीधे आर्थिक फायदा मिल रहा है. और उनके परिवार के पोषण स्तर में भी बड़ा सुधार हो रहा है. योजना दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण अंचल की महिलाओं को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर रही है.

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कैसे होगी कमाई?
अब बात करते हैं कि इस पूरे काम से आपकी जेब में पैसा कैसे आएगा. जब ये 45 चूजे 4 से 5 महीने में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. तो मुर्गियां अंडे देना शुरू कर देती हैं. बाजार में आजकल देसी अंडों की जबरदस्त डिमांड है. जो 10 से 15 रुपये प्रति पीस तक आसानी से बिक जाते हैं.
इसके अलावा तैयार देसी मुर्गों और मुर्गियों की कीमत भी लोकल मार्केट और ढाबों पर काफी अच्छी मिलती है. अंडे और पक्षियों की बिक्री से हर महीने घर बैठे 6 से 8 हजार रुपये की शुद्ध बचत आसानी से निकल आती है.
कहां करना होगा संपर्क?
अगर आप भी इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं. तो इसके लिए प्रोसेस बहुत सीधी है. आपको अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र या पशुधन विकास विभाग के दफ्तर में जाकर संपर्क करना होगा. वहां अपना आधार कार्ड, बैंक खाता और निवास प्रमाण पत्र जमा करके आप लाभार्थी सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं. जिसके बाद आपको चूजे और दाना दिया जाएगा.
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