देशभर में लाखों किसान हर साल ट्रैक्टर, थ्रेशर, सीड ड्रिल, स्ट्रॉ बेलर, रीपर और अन्य कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकारी सब्सिडी के लिए आवेदन करते हैं. कृषि मशीनीकरण पर सब-मिशन यानी SMAM स्कीम और राज्यों की अपनी योजनाओं के तहत किसानों को यंत्र खरीदने पर 40 से 50 प्रतिशत तक की सहायता मिलती है. लेकिन हर साल बड़ी संख्या में आवेदन रिजेक्ट भी हो जाते हैं. अगर आपका आवेदन भी खारिज हुआ है, तो हो सकता है कि नीचे बताई गई इन्हीं गलतियों में से कोई एक इसकी वजह बनी हो.
दस्तावेजों में गड़बड़ी सबसे बड़ी वजह
सब्सिडी आवेदन रिजेक्ट होने का सबसे आम कारण दस्तावेजों में कमी या गलती होना है. खसरा-खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जमीन के कागजातों में नाम, पते या जमीन के रकबे को लेकर मामूली-सी भी गड़बड़ी हो, तो पोर्टल आवेदन को अस्वीकार कर देता है. कई बार किसान पुराने या धुंधले स्कैन किए गए दस्तावेज अपलोड कर देते हैं, जिन्हें सिस्टम पढ़ ही नहीं पाता.
आधार और बैंक खाता लिंक न होना
बहुत से मामलों में आधार कार्ड किसान के बैंक खाते से लिंक नहीं होता, जबकि सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए भेजी जाती है. अगर आधार-बैंक लिंकिंग में कोई दिक्कत है, तो आवेदन आगे बढ़ने से पहले ही अटक जाता है. इसके अलावा बैंक खाता किसान के अपने नाम पर होना जरूरी है, संयुक्त खाता या परिवार के किसी और सदस्य के नाम का खाता देने पर भी आवेदन में परेशानी आ सकती है.
पंजीकरण पोर्टल पर जानकारी अधूरी होना
ज्यादातर राज्यों में सब्सिडी के लिए आवेदन से पहले किसान का किसी कृषि पोर्टल, जैसे मेरी फसल मेरा ब्यौरा या इसी तरह के राज्य पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी होता है. अगर वहां फसल, जमीन या मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी अधूरी या गलत भरी गई है, तो सब्सिडी वाला आवेदन भी रिजेक्ट हो सकता है, क्योंकि दोनों पोर्टल का डेटा आपस में मिलाया जाता है.
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पहले से सब्सिडी ले चुके यंत्र पर दोबारा आवेदन
कई योजनाओं में यह शर्त होती है कि एक तय समय अवधि, जैसे पांच या सात साल, में एक ही तरह के यंत्र पर एक बार ही सब्सिडी दी जाएगी. अगर किसान ने पहले भी उसी श्रेणी के यंत्र पर सब्सिडी ली है और तय अवधि पूरी हुए बिना दोबारा आवेदन कर देता है, तो सिस्टम उसे अपने आप रिजेक्ट कर देता है.
तय ब्रांड या डीलर से खरीद न करना
कई राज्यों में सब्सिडी सिर्फ सरकार से पंजीकृत डीलरों या तय कंपनियों से खरीदे गए यंत्रों पर ही मिलती है. अगर किसान किसी स्थानीय या गैर-पंजीकृत विक्रेता से मशीन खरीद लेता है, तो बिल और अन्य कागजात होने के बावजूद सब्सिडी का दावा खारिज हो सकता है.
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