नागौरी पान मेथी को कई जगह कसूरी मेथी या पान मेथी के नाम से भी जाना जाता है. इसकी सूखी पत्तियों में खास खुशबू होती है, इसलिए इनका इस्तेमाल मसालों में किया जाता है. यह आम मेथी से अलग प्रजाति की फसल है और इसकी पत्तियों को सुखाकर बेचा जाता है.

नागौरी पान मेथी रबी मौसम की फसल है. इसकी बुवाई के लिए ठंडा और हल्का सूखा मौसम सही माना जाता है. आमतौर पर इसकी बुबाई सितंबर से नवंबर के बीच की जाती है. खेत की मिट्टी ऐसी होनी चाहिए, जिसमें पानी आसानी से निकल सके. खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है. बीज खरीदते समय यह जरूर देख लें कि वह नागौरी पान मेथी का ही हो.

बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर ले और मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद डालें. फसल में नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. खरपतवार को समय पर निकालना भी जरूरी है, ताकि पौधों को पोषण और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले.

नागौरी पान मेथी की एक खास बात यह है कि इसकी पत्तियों की एक सीजन में कई बार कटाई की जा सकती है. किसान पत्तियों को काटने के बाद सुखाकर बेचते हैं. अच्छी क्वालिटी बनाए रखने के लिए पत्तियों को साफ जगह पर सावधानी से सुखाना जरूरी है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े एक रिसर्च में नागौर जिले में पान मेथी की खेती की औसत लागत करीब 1.47 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई थी. इसे एक एकड़ के हिसाब से देखें तो लागत लगभग 60 हजार रुपये बैठती है.

नागौरी पान मेथी से एक एकड़ से एक सीजन में करीब 2.5 लाख रुपये तक की बिक्री हो सकती है. लेकिन इसे शुद्ध मुनाफा नहीं समझना चाहिए. असली कमाई में से खेती, कटाई, सुखाई, पैकिंग और ढुलाई का खर्च घटाना होगा. बुवाई से पहले खरीदार और पत्तियों का भाव तय कर लेना भी जरूरी है.
Published at : 14 Oct 2026 04:35 PM (IST)
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